मेरठ। सेंट्रल मार्केट प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को यानी आज होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों की निगाहें हैं। भू उपयोग परिवर्तन पर कोर्ट का क्या रुख रहता है, इसको लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में 860 भूखंडों पर निर्मित दुकानों के भविष्य को लेकर इसमें फैसला होने की उम्मीद है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास व आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरुप्रसाद और मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उप्र आवास एंव विकास परिषद ने चार अप्रैल को अपना हलफनामा कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया है। परिषद ने अपनी रिपोर्ट में 210 निर्माण ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनका भू उपयोग परिवर्तन संभव नही हैं। रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन को भी दी गई है।
लोकेश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने परिषद की रिपोर्ट पर अपना पक्ष तैयार करा दिया है। इसे सोमवार को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
दो अप्रैल की कार्रवाई के दौरान कोर्ट ने परिषद द्वारा दी गई रिपोर्ट पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने परिषद को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि चार अप्रैल को जो रिपोर्ट परिषद ने दी है, उसमें इस बात का ब्यौरा दिया है कि कितने भूखंडों पर आंशिक निर्माण है और कितनों पर पूरी तरह व्यावसायिक निर्माण किया गया है।
वहीं, व्यापारियों ने भी अपने अधिवक्ता को अवैध निर्माण को हटाने के लिए की जा रही कार्रवाई का पूरा ब्यौरा उपलब्ध करा दिया है। व्यापारियों ने कहा कि वह परिषद के प्रविधानों के अनुसार अपना-अपना निर्माण वैध कराने और शुल्क जमा करने को तैयार हैं।
परिषद द्वारा दो अप्रैल को दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि 860 भूखंडों में से 144 ने दुकानों को बंद कर दिया है। 215 भूखंडों के मालिकों ने कहा कि उन्होंने अपने आवासीय भूखंडों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। इस तरह 501 संपत्तियां शेष हैं, जिनमें से 250 ने भू उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन किया है।
इस रिपोर्ट को कोर्ट ने वास्तविकता से परे बताया था। नई दाखिल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ऐसी संपत्तियों का ब्यौरा दिया गया है जिन्होंने अपने अवैध निर्माण को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। यही नहीं भू उपयोग परिवर्तन के लिए भी आवेदन नहीं किया है। ऐसे निर्माणों का ध्वस्तीकरण तय माना जा रहा है। ऐसे निर्माणों की संख्या 100 के आसपास है।
पूर्व कमिश्नर को इसलिए दिया है उपस्थित होने का आदेश
दो अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद के 27 अक्टूबर 2025 के आदेश को व्यथित करने वाला बताया था। वर्तमान में राजस्व सचिव ने यह आदेश सेंट्रल मार्केट 661/6 पर निर्मित कांप्लेक्स के ध्वस्त होने के बाद दिया था। जोकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में किया गया था।
आदेश में कहा गया था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब नहीं होगी। इसके साथ सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट घोषित करने के लिए मास्टर प्लान में प्रविधान करने के लिए कहा था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत माना गया है। इसीलिए कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
