हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को हरिद्वार के बैरागी कैंप में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम में विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश में अवैध घुसपैठ को समाप्त करने के लिए सरकार की संकल्पबद्धता जताई और कहा कि केदारनाथ से कन्याकुमारी तक एक-एक घुसपैठिये को बाहर किया जाएगा।
अमित शाह ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बताया कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्यों के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया। आज ये राज्य तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अटल जी ने उत्तराखंड बनाया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे संवारने का काम हो रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से 2026 तक का समय उत्तराखंड के विकास को समर्पित रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की समस्याओं को चुन-चुन कर हल करने का काम किया है। उन्होंने राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नकल विरोधी कानून की सराहना की, जिससे युवाओं को ‘बिना पर्चा और बिना खर्चा’ सरकारी नौकरियों का लाभ मिल रहा है।
अमित शाह ने नई न्याय संहिता का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों के समय के 150 साल पुराने कानूनों को बदलकर नई व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 तक नई न्याय संहिता पूरी तरह लागू हो जाएगी और इसके बाद किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अंतिम निर्णय में अधिकतम तीन साल का समय लगेगा।
केंद्रीय मंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक नागरिकता देने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये लोग अपने धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए भारत आए हैं और उन्हें सम्मान के साथ भारत में नागरिकता प्रदान की जाएगी।
अमित शाह ने उत्तराखंड पुलिस में आरक्षी पद पर नियुक्त 1900 युवाओं को बधाई दी। उन्होंने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के बारे में कहा कि यह मेला सभी रिकॉर्ड तोड़ेगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाइब्रेंट विलेज योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों को “प्रथम गांव” का दर्जा देकर पलायन रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच उत्तराखंड को केंद्र से लगभग 54 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2014 के बाद यह राशि करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि राज्य में ऑल वेदर रोड, दिल्ली–देहरादून आर्थिक कॉरिडोर, रेल और अन्य परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2014 में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.25 लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर 2.60 लाख रुपये हो चुकी है, जबकि राज्य का जीएसडीपी 1.5 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
