देहरादून/नई दिल्ली। भारत सरकार ने जन विश्वास विधेयक 2025 के तहत विभिन्न अधिनियमों में संशोधन करते हुए जीवन और व्यापार को आसान और तर्कसंगत बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26(8) में भी बदलाव किए गए हैं।
जुर्माने के नए प्रावधान
रजिस्ट्रार एस. फर्स्वाण ने बताया कि पहले के प्रावधान के अनुसार यदि कोई औषधि निर्माण इकाई या मेडिकल स्टोर फार्मेसी इंस्पेक्टर के कार्य में बाधा डालता था, तो इसके लिए छह माह का कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड का प्रावधान था।
अब संशोधन के अनुसार, कारावास की जगह 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इस कदम को दंडात्मक व्यवस्था को व्यावहारिक और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फार्मेसी निरीक्षण और पंजीकृत फार्मासिस्ट की पुष्टि
संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फार्मेसी इंस्पेक्टर को दवा निर्माण इकाइयों और वितरण इकाइयों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित कार्य में लगे व्यक्ति पंजीकृत (रजिस्टर्ड) फार्मासिस्ट हैं या नहीं।
यह प्रावधान दवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लापरवाही रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन अनावश्यक आपराधिक प्रावधानों को कम करने के साथ-साथ दवा क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
