समालखा (पानीपत)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाहक सीआर मुकुंद ने कहा कि शताब्दी वर्ष में अब तक 46 में से 37 प्रांतों में हुए गृह संपर्क अभियान में 10 करोड़ घरों और 3.90 लाख गांवों में संवाद किया गया है।
देशभर में 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है। शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सदभाव, समरसता के लिए संगठित करना है। वह शुक्रवार को माधव सृष्टि में पत्रकारों को प्रतिनिधि सभा के विभिन्न विषयों एवं गतिविधियों की जानकारी दे रहे थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को माधव सृष्टि में प्रारंभ हो गई। सुबह नौ बजे संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत एवं सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। इसमें देशभर के 1487 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें शताब्दी वर्ष में अब तक के आयोजनों की समीक्षा के साथ-साथ इस वर्ष होने वाले कार्यक्रमों पर मंथन किया गया।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च निर्णायक इकाई है। पहले दिन मंच पर सरसंघचालक मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ही बैठे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पहली पंक्ति में जगह मिली। सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने बताया कि पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थी, जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाओं का आंकड़ा हो गया है। इस प्रकार एक वर्ष में 3943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5820 की वृद्धि हुई है।
अब तक देश के कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों और 3.90 लाख गांवों तक संपर्क किया जा चुका है। अकेले केरल में ही 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम घरों और 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों से सम्पर्क किया गया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर एवं प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व एवं स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण और नागरिकों को कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत भी इन विषयों पर समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए चारों महानगरों सहित राज्यों की राजधानियों में कार्यक्रमों में सहभागिता कर रहे हैं।
भागवत ने केवल चार महानगरों में आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों के साथ संवाद करते हुए एक हजार से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए। इस प्रश्नोत्तर में 20 घंटे से अधिक का समय लगा।
बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति सुधारे सरकार
सीआर मुकुंद ने कहा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति चिंताजनक है। वहां की सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आशा जताई कि वहां हिंदू समाज के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी संघ ने स्वागत किया है। मणिपुर में भी शांति और स्थायित्व की स्थिति बहाल होना संतोषजनक है और इसमें संघ के स्वयंसेवकों की भी भूमिका उल्लेखनीय है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संघ चाहता है कि शांति बनी रहे। यह सरकार का काम है और सरकार प्रयास कर रही है।
हिंदू सम्मेलनों से पंच परिवर्तन का आह्वान
देश में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है। इनमें लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों नें सहभागित की। यह सम्मेलन शहरी, ग्रामीण, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भी हुए हैं। इनमें समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों की पालना के लिए पंच परिवर्तन के लिए आह्वान किया गया।
दिवंगतों को श्रद्धांजलि
बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें प्रमुख रूप से शिवकथाकार सतगुरुदास महाराज, पर्यावरणविद डॉ. माधव गाडगिल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, पर्यावरण के लिए समर्पित सालुमरदा थिमक्का, पुरातत्वविद केएन दीक्षित, महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, अभिनेता धर्मेंद्र देओल, तमिल फिल्म निर्माता एवीएम सरवनन, मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल, शिक्षाविद विनय हेगड़े, कम्युनिस्ट नेता आर नल्लकणु, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रफुल्ल गोविंद बरुआ के नाम सम्मिलित हैं।
