लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार इस वर्ष भी हरियाली का नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। सरकार ने एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का निर्णय किया है। पौधारोपण अभियान को योजनाबद्ध और परिणाम आधारित बनाने की तैयारियां भी शुरू हो गईं हैं।
गांव से लेकर शहर तक ”माइक्रोप्लानिंग” मॉडल लागू करते हुए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। खास बात यह है कि अब पौधारोपण सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी देखरेख, जीवितता और नियमित निगरानी पर भी समान रूप से फोकस किया जाएगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने पौधारोपण के लिए जो विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है उसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत को इस अभियान की मूल इकाई बनाया गया है। ग्रीन चौपाल के जरिये स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए हर पंचायत में माइक्रोप्लान तैयार किया जाएगा।
किस गांव में कहां-कहां और कौन-कौन से पौधे लगने हैं यह तय होगा। इस अभियान को ”सबकी योजना-सबका विकास” से जोड़ते हुए ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में भी शामिल किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि पौधारोपण अभियान से आम आदमी जुड़ाव महसूस कर सके। राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के किनारे छायादार पेड़ लगाना भी अनिवार्य किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में भी यही मॉडल लागू किया गया है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर माइक्रोप्लान बनाकर सघन पौधारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा। मियावाकी पद्धति को इस बार भी और बढ़ाया दिया जाएगा।
इस पद्धति के जरिए शहरों में कम स्थान पर बहुत जल्द घने जंगल विकसित हो जाते हैं। प्रदेश सरकार एक मार्ग-एक प्रजाति थीम के तहत सड़कों के किनारे आकर्षक और छायादार पेड़ इस भी बड़ी संख्या में लगाने जा रहा है। कुल मिलाकर, इस बार का पौधारोपण अभियान सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर पौधे को जीवित रखने और हर क्षेत्र को हराभरा बनाने की ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।
महिलाओं, स्वयंसेवी संगठनों व युवाओं की भागीदारी होगी सुनिश्चित
अभियान की खासियत यह भी है कि इसमें महिलाओं, स्वयंसेवी संगठनों, एनसीसी, एनएसएस, युवा मंडलों और सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा पौधों की सप्लाई से लेकर रोपण स्थल तक पहुंचाने की पूरी लॉजिस्टिक्स योजना भी पहले से तैयार की जाएगी।
पौधारोपण की निगरानी के लिए हाईटेक सिस्टम लागू किया गया है। ग्राम स्तर से लेकर जिला और फिर लखनऊ स्थित कमांड सेंटर तक हर दिन की रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसे वन विभाग के प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम (पीएमएस) पर अपलोड किया जाएगा। इससे पूरे प्रदेश में चल रहे अभियान की रियल टाइम निगरानी संभव होगी।
