चंडीगढ़: जनहित में सपने देखना और उन सपनों को पूरा करवाने के लिए वर्षों तक पीछे लगकर संघर्ष करना, राजनीति के मौजूदा दौर में यह कार्यशैली अब कम ही नेताओं में देखने को मिलती है। ऐसे समय में हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज की राजनीतिक कार्यशैली एक अलग पहचान बनाती है। विज जिस जनहित के मुद्दे को उठाते हैं, उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। अंबाला कैंट में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति में निर्मित भव्य शहीदी स्मारक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह स्मारक केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में अनिल विज की एक महत्वपूर्ण और अद्भुत देन है।
5 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा इस स्मारक का लोकार्पण अनिल विज के वर्षों पुराने संकल्प की परिणति बनकर सामने आया। समारोह के दौरान अमित शाह ने जिस तरह सार्वजनिक मंच से अनिल विज के संघर्ष, समर्पण और ऐतिहासिक सोच की सराहना की, उसने इस उपलब्धि को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।
अमित शाह ने बताया विज के संघर्ष का किस्सा
अमित शाह ने अपने संबोधन में अनिल विज के साथ हुई हालिया मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि विज उनसे मिले थे और उन्होंने शहीदी स्मारक के बारे में विस्तार से समझाया था। गृह मंत्री ने कहा, “अनिल विज पिछले दिनों मुझसे मिले थे। शहीद स्मारक के बारे में इन्होंने मुझे समझाया व बताया। इनके चेहरे पर न थकावट आई, न ही शिकन।” अमित शाह ने मंच से विज को विशेष बधाई देते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सहयोग से मां अंबा की धरती पर यह विराट शहीदी स्मारक बनकर तैयार हुआ है।
विपक्ष में रहते हुए उठाई मांग, सरकार में आकर पूरा कराया सपना
अनिल विज का यह ड्रीम प्रोजेक्ट किसी एक दिन की सोच का परिणाम नहीं है। अंबाला कैंट के विधायक के रूप में विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने हरियाणा विधानसभा में 1857 के शहीदों की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर का स्मारक बनाने की मांग उठाई थी। उनकी सोच स्पष्ट थी कि आजादी की पहली लड़ाई में अंबाला की भूमिका को राष्ट्रीय इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले हजारों वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन अनेक क्रांतिकारियों के नाम इतिहास की पुस्तकों में पर्याप्त स्थान नहीं पा सके। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद विज ने इस मांग को मूर्त रूप देने के लिए लगातार प्रयास किए। सरकार का सहयोग मिला और वर्षों पुराना विचार एक भव्य ऐतिहासिक परिसर के रूप में विकसित हुआ। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से 22 एकड़ में निर्मित यह स्मारक अब 1857 की क्रांति की गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
23 गैलरियों में जीवंत हुई 1857 की क्रांति
शहीदी स्मारक की विशेषता इसका आधुनिक और तकनीक आधारित स्वरूप है। यहां 23 आधुनिक गैलरियों के माध्यम से 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है।
अमित शाह की सराहना से मजबूत हुआ विज का राजनीतिक कद
अंबाला कैंट की विशाल रैली में अमित शाह द्वारा अनिल विज की जिस तरह प्रशंसा की गई, उसका महत्व केवल शहीदी स्मारक के निर्माण तक सीमित नहीं है। हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल विज की पहचान एक स्पष्टवादी, जनहित के मुद्दों पर मुखर और अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करने वाले नेता की रही है। ऐसे में देश के गृह मंत्री और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में शामिल अमित शाह द्वारा सार्वजनिक मंच से उनके योगदान को स्वीकार करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से अमित शाह का यह कहना कि अंबाला कैंट की जनता स्मारक के साथ अनिल विज को भी याद रखेगी, विज के राजनीतिक योगदान को दीर्घकालिक पहचान देने वाला बयान है।अंबाला कैंट की विशाल रैली ने यह संदेश भी दिया कि जनहित में किए गए लंबे संघर्ष और ऐतिहासिक योगदान को पार्टी का शीर्ष नेतृत्व महत्व देता है। अमित शाह की सराहना ने अनिल विज के राजनीतिक कद को और मजबूती प्रदान की है।
स्मारक नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर
अंबाला की धरती पर निर्मित शहीदी स्मारक अनिल विज के लिए केवल एक परियोजना का पूरा होना नहीं, बल्कि वर्षों पहले देखे गए सपने का साकार होना है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को बताएगा कि देश की आजादी हजारों ज्ञात-अज्ञात वीरों के संघर्ष, साहस और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम थी।
राजनीति में जहां अक्सर घोषणाओं और वादों की चर्चा होती है, वहीं अनिल विज का यह ड्रीम प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और जनहित के प्रति समर्पण से किसी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अमित शाह के हाथों लोकार्पण और मंच से मिली विशेष सराहना ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। अंबाला कैंट का शहीदी स्मारक अब इतिहास, राष्ट्रभक्ति और अनिल विज के लंबे संघर्ष की ऐसी धरोहर बनकर सामने आया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
