शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पिछले 10 वर्षों से कानूनी मामलों के कारण चर्चा में हैं। वह 2017, 2022 और अब 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले लगातार राजनीतिक निशाने पर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने तीनों चुनावों में उन्हें चुनावी मुद्दा बनाकर अकाली दल को घेरा है।
2017 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मजीठिया पर नशा तस्करों से संबंध के आरोप लगाए थे। पार्टी के नेताओं ने उन्हें जेल भेजने का वादा किया। बाद में मजीठिया ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। मार्च 2018 में केजरीवाल ने मजीठिया से माफी मांग ली। हालांकि, नशे के आरोपों की जांच जारी रही और 2022 चुनाव से ठीक पहले प्राथमिकी दर्ज हुई। 20 दिसंबर 2021 को मोहाली में एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
2022 चुनाव और गिरफ्तारी
तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार ने मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई की। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मजीठिया ने 24 फरवरी 2022 को मोहाली की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। उन्हें न्यायिक हिरासत में पटियाला जेल भेजा गया। करीब साढ़े पांच महीने बाद 10 अगस्त 2022 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिली। 2022 चुनाव में वह अमृतसर पूर्वी सीट से नवजोत सिंह सिद्धू से हार गए।
आय से अधिक संपत्ति का मामला
2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी नशा तस्करी का मामला जांच के दायरे में रहा। 25 जून 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार किया। विजिलेंस के अनुसार, जांच में करीब 540 करोड़ रुपये के कथित अवैध धन का पता चला। 22 अगस्त 2025 को मोहाली की विशेष अदालत में 40 हजार पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसमें करीब 700 करोड़ रुपये की संपत्तियों और वित्तीय अनियमितताओं का विवरण था। मजीठिया को 2 फरवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई।
2027 चुनाव से पहले पूरक आरोप पत्र
2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मजीठिया फिर सुर्खियों में हैं। 28 अक्तूबर 2026 को विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति मामले में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें करीब 736 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और वित्तीय लेन-देन का विवरण है। आरोप पत्र में 161 करोड़ रुपये के कथित बेहिसाब नकद जमा और 141 करोड़ रुपये के विदेशी लेन-देन का उल्लेख है। 236 करोड़ रुपये कंपनियों के खातों में कथित अस्पष्ट जमा भी बताए गए हैं। कुल दाखिल दस्तावेज का आकार 52 से 53 हजार पन्नों तक पहुंच गया है। मजीठिया इन आरोपों को झूठा बताते हुए सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों का अंतिम फैसला अभी अदालत में होना बाकी है।
