गैरसैंण: ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के विकास के मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है. बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कर्णप्रयाग के वर्तमान बीजेपी विधायक अनिल नौटियाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए वर्तमान विधायक की तुलना ‘कुंभकर्ण’ से कर दी. साथ ही नौकरशाही पर गैरसैंण के विकास में जानबूझकर अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया.
‘कुंभकर्ण’ 6 महीने में जागता है, लेकिन विधायक 5 साल से सोए हैं: गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का गुस्सा वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल पर जमकर फूटा. उन्होंने कहा कि गैरसैंण विधानसभा और क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद के साथ विधायक चुना था, उस पर पानी फिर गया है.
सुरेंद्र नेगी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गैरसैंण के चौमुखी विकास के लिए 5 से 6 प्रमुख मांगें तैयार की थीं, जिन्हें लेकर पिछले पांच सालों में विधायक अनिल नौटियाल को लगातार कई पत्र लिखे गए. बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायक ने इन पांच सालों में एक भी पत्र का संज्ञान नहीं लिया और न ही किसी सार्वजनिक मंच या सरकार के सामने इन बुनियादी मांगों को उठाया.
“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कई गैरसैंण दौरे हुए. यहां विधानसभा सत्र आयोजित हुए और राज्य स्थापना दिवस के बड़े कार्यक्रम भी हुए, लेकिन विधायक नौटियाल ने कभी भी सीएम के सामने गैरसैंण के विकास का खाका नहीं रखा.“- सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व विधायक, बीजेपी
“विधायक अनिल नौटियाल ने विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर एक भी सवाल नहीं पूछा. पौराणिक कथाओं में कुंभकर्ण भी 6 महीने में एक बार जाग जाता था, लेकिन हमारे माननीय विधायक पिछले 5 सालों से गहरी नींद में सोए हुए हैं.“- सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व विधायक, बीजेपी
25 हजार करोड़ की घोषणाओं पर नहीं बढ़ा एक इंच काम: पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने साल 2017 के घटनाक्रमों को याद करते हुए कहा कि जब वे विधायक बने थे, तब गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए जी-जान से प्रयास किए गए थे.
उस समय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई थी. तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण राजधानी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 सालों के भीतर 25 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का ऐतिहासिक ऐलान किया था.
उन्होंने कहा कि इस भारी-भरकम बजट के तहत गैरसैंण में एक विशाल कृत्रिम झील का निर्माण, प्रतिष्ठित भाषा संस्थान की स्थापना और एक अत्याधुनिक मिनी सचिवालय का निर्माण किया जाना तय हुआ था, लेकिन आज हकीकत ये है कि इन बड़ी योजनाओं पर एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ पाया है.
यदि सरकार ने हर साल के बजट में इस घोषित राशि का आनुपातिक प्रावधान किया होता, तो आज तक साढ़े 12 हजार करोड़ रुपए गैरसैंण परिक्षेत्र के विकास पर खर्च हो चुके होते और यहां की तस्वीर बदल गई होती.
सचिवालय निर्माण को लेकर नोकरशाही को घेरा: मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने सूबे की नौकरशाही पर जमकर हमला किया. सुरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड की ब्यूरोकेसी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि,
“उत्तराखंड के बड़े अधिकारी पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते हैं. वे देहरादून के एसी कमरों से बाहर नहीं निकलना चाहते. इसलिए जानबूझकर गैरसैंण के प्रोजेक्ट्स को लटकाया जा रहा है.“- सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व विधायक, बीजेपी
सुरेंद्र नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि साल 2015 में तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही गैरसैंण में मिनी सचिवालय के निर्माण को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी थी. इसके लिए 53 करोड़ रुपए की भारी धनराशि भी स्वीकृत की गई थी.
इतना ही नहीं भारत सरकार के उपक्रम और निर्माणदायी संस्था ‘वापकोस’ (WAPCOS) को शुरुआती काम के लिए साल 2015 में ही 3 करोड़ रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी गई थी. मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए केवल भूमि का हस्तांतरण होना शेष था, लेकिन बड़े अफसरों की घोर लापरवाही के कारण 11 साल बीत जाने के बाद भी आज तक जमीन का ट्रांसफर नहीं हो सका है.
पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने आर्थिक नुकसान की बात उठाते हुए कहा कि अधिकारियों की इस सुस्ती की वजह से जो सचिवालय 11 साल पहले 53 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हो जाना था, उसकी निर्माण लागत आज बढ़कर 80 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है.
यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और राज्य की जनता के साथ बड़ा धोखा है. उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिस भी आईएएस या विभागीय अधिकारी की लापरवाही के कारण यह प्रोजेक्ट 11 साल से अटका हुआ है, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर मौजूदा बीजेपी विधायक अनिल नौटियाल ने अपना पक्ष रखा. साथ ही पूर्व बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी के आरोपों पर भी जवाब दिया. विधायक नौटियाल ने कहा कि,
“सुरेंद्र सिंह नेगी हमारे वरिष्ठ नेता हैं और बड़े भाई हैं. वे पार्टी से विधायक रहे हैं. पार्टी ने हर सम्मान उनको दिया है. उन्होंने किस कारण आरोप लगाए हैं, यह समझ से परे है. कहां कि बात वो कह रहे हैं, उनसे इस संबंध में जरूर पूछेंगे.“- अनिल नौटियाल, बीजेपी विधायक, कर्णप्रयाग
“पिछली बार विधानसभा सत्र के दौरान सदन में मेरे द्वारा गैरसैंण को जिला बनाए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी. गैरसैंण में पेयजल योजना हो या सड़क निर्माण की बात हो, लगातार काम हो रहे हैं, जिन्हें जनता भी भली-भांति देख रही है. खराब सड़क समेत अन्य समस्यायें मेरे ही कार्यकाल के दौरान नहीं हुई.“- अनिल नौटियाल, बीजेपी विधायक, कर्णप्रयाग
उन्होंने कहा कि आज डिग्री कॉलेज मोटर मार्ग, कारगिल शहीद के गांव जाने वाली धुनारघाट-बटाधार मोटर मार्ग, डिग्री कॉलेज मोटर मार्ग, फरकंडे मोटर मार्ग समेत तमाम सड़कों का कार्य हो रहे हैं. जिन्हें जनता भी भली भांति देख रही है. इसी प्रकार से साल 2013 से अधर में लटका भरसार विश्वविद्यालय का कैंपस बन रहा है, जो भी कार्य हो रहे हैं, धरातल पर दिखाई दे रहे हैं. आरोप लगाना निराधार है.
