लखनऊ : निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009) के तहत पात्र बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने को लेकर प्रदेश सरकार ने 698.27 करोड़ आवंटित किए गए हैं. बजट आवंटन को लेकर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का कहना है कि सरकार आरटीई के अंतर्गत पात्र बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का कोई भी बच्चा गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा.
महानिदेशक, (स्कूल शिक्षा) मोनिका रानी के अनुसार, वर्ष 2025-26 तक 536285 बच्चे अध्ययनरत थे. वर्ष 2026-27 में 157127 नए प्रवेश होने के बाद बच्चों की कुल संख्या बढ़कर 693412 हो गई है. वहीं, वित्तीय वर्ष 2027-28 में लगभग 1 लाख 70 हजार नए प्रवेश होने की संभावना के आधार पर 85 करोड़ की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है.
431.71 करोड़ की धनराशि का बजट प्रस्ताव तैयार : महानिदेशक, (स्कूल शिक्षा) के अनुसार, वर्ष 2026-27 में अध्ययनरत बच्चों और वर्ष 2027-28 में संभावित नए प्रवेश वाले बच्चों को ध्यान में रखते हुए कुल 431.71 करोड़ की धनराशि का बजट प्रस्ताव तैयार किया गया है. उन्होंने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में आरटीई के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति मद में 362.56 करोड़ आवंटित किए गए हैं. जबकि आरटीई के अंतर्गत वित्तीय सहायता मद में 335.70 करोड़ का आवंटन किया गया है. शुल्क प्रतिपूर्ति और वित्तीय सहायता के लिए निर्धारित कुल 698.27 करोड़ की राशि आवंटित हुई है.
1 लाख 70 हजार नए प्रवेश होने की संभावना : विभागीय के अनुसार, वर्ष 2026-27 में 157127 नए बच्चों का प्रवेश दर्ज किया गया है. जिसको ध्यान में रखते हुए वर्ष 2027-28 में लगभग 1 लाख 70 हजार नए प्रवेश होने की संभावना व्यक्त की गई है. इसके लिए 85 करोड़ की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है.
निजी स्कूलों में होता है निःशुल्क दाखिला : निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम भारत में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान करता है. यह अधिनियम 1 अप्रैल 2010 को पूरे देश में लागू हुआ था. इस अधिनियम के तहत गरीब परिवारों के बच्चों का नामांकन लाटरी के जरिये निजी स्कूलों में होता है.
