देहरादून: उत्तराखंड के स्थानीय किसानों और पशुपालकों को उनके उत्पादों के लिए संस्थागत बाजार उपलब्ध कराने को लेकर राज्य सरकार ने दो साल पहले Farmer-to-ITBP Integrated Local Supply Chain Initiative (किसान से ITBP की एकीकृत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला पहल) का महत्वपूर्ण पहल शुरू किया था. ऐसे में इस पहल को एक और वर्ष के लिए विस्तार दे दिया गया है. गुरुवार को देहरादून में पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा की मौजूदगी में आईटीबीपी और पशुपालन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास विभाग के बीच आगामी एक साल के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया.
इस समझौता ज्ञापन पर पशुपालन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास विभाग के सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम और आईटीबीपी की ओर से महानिरीक्षक मनु महाराज ने हस्ताक्षर किए. इस पहल का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय किसानों एवं पशुपालकों को उनके उत्पादन के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक संस्थागत बाजार उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादों को सुरक्षा बलों की मांग से जोड़ना है. इस पहल के तहत स्थानीय किसानों की ओर से उत्पादित जीवित भेड़-बकरी, ब्रायलर पोल्ट्री एवं ट्राउट मछली की आपूर्ति, आईटीबीपी की 14 बटालियनों को की जा रही है.
उत्तराखंड सरकार और आईटीबीपी के बीच पूर्व में हुए समझौता ज्ञापन के चलते अभी तक 3 लाख 56 हजार किलोग्राम जीवित भेड़-बकरी, 2 लाख 40 हजार किलोग्राम जीवित कुक्कुट, 56 हजार किलोग्राम ट्राउट मछली की सप्लाई आईटीबीपी को की गई है. इस व्यवस्था से उत्तराखंड के 450 से अधिक किसान परिवारों और 42 प्राथमिक सहकारी समितियों के साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को संस्थागत बाजार से जोड़ा गया है. खास बात ये है कि किसानों को उत्पाद का भुगतान पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से सीधे बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान की जा रही है.
इस पहल के तहत अब तक किसानों को 17.02 करोड़ रुपए की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है. विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.66 करोड़ रुपए, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10.02 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2026-27 में अभी तक 5.34 करोड़ रुपए की खाद्य सामग्री आईटीबीपी, उत्तराखंड के स्थानीय किसानों से खरीद चुकी है. ऐसे में एमओयू का समय एक साल के लिए और बढ़ गया है, जिससे स्थानीय किसानों को और फायदा मिलेगा.
आईटीबीपी के साथ स्थापित इस आपूर्ति व्यवस्था के आधार पर भारतीय सेना और एसएसबी के चयनित पोस्ट एवं प्रतिष्ठानों को भी मांग के आधार पर स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति शुरू की गई है. इससे स्थानीय किसानों के लिए संस्थागत बाजार का दायरा और बढ़ गया है. एमओयू के आगामी एक साल के लिए विस्तार के साथ उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य इस किसान केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करना, स्थानीय किसानों एवं पशुपालकों की भागीदारी बढ़ाना और सुरक्षा बलों की मांग के अनुरूप स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति को विस्तार देना है.
वहीं, पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि, इस व्यवस्था के लिए 2 साल पहले आईटीबीपी के साथ सरकार ने एमओयू किया था. ताकि प्रदेश के दुर्गम और सीमांत इलाकों में रह रहे पशुपालकों को संस्थागत बाजार उपलब्ध कराया जा सके. ताकि पशुपालकों का आय बढ़े और पलायन पर लगाम लगे. ऐसे में 2 साल पहले आईटीबीपी के साथ उत्तराखंड सरकार का एमओयू हुआ. जिससे उत्तराखंड, देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने इस तरह की पहल की. जिसका फायदा ये हुआ कि इन दो सालों में आईटीबीपी के साथ 17.5 करोड़ रुपए का व्यापार कर चुके हैं.
वर्तमान समय में इस योजना के तहत प्रदेश के तीन सीमांत जिलों पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमोली पर विशेष फोकस किया गया है. जहां से आइटीबीपी को खाद्य सामग्री की सप्लाई की जा रही है. ऐसे में इन तीनों जिलों से लगते हुए अन्य जिलों बागेश्वर, टिहरी अल्मोड़ा और रुद्रप्रयाग से भी खाद्य सामग्रियों के प्रोक्योरमेंट को लेकर आईटीबीपी से अनुरोध किया गया है. अगर इन जिलों से भी खाद्य सामग्रियों का प्रोक्योरमेंट होता है तो उससे इन जिलों के रहने वाले पशुपालकों और किसानों को भी राहत मिलेगी. उत्तराखंड की ओर से शुरू किए गए इस पहल के बाद अब हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश ने भी इस पहल को अडॉप्ट किया है.
-सौरभ बहुगुणा, पशुपालन मंत्री, उत्तराखंड-
