देहरादून: आखिरकार हरीश रावत को हाईकमान की हिदायत के बाद अपनी धन्यवाद यात्राएं कैंसिल करनी पड़ी. इसको लेकर हरीश रावत ने एक पोस्ट भी किया है. हरीश रावत ने कहा कि उन्हें 9 और धन्यवाद यात्राएं प्लान की थी, जिनके आयोजन के लिए लोगों को दायित्व सौंप दिया था, अब उन 9 यात्राओं को स्थगित करना पड़ रहा है.
हरीश रावत ने कहा कि धन्यवाद यात्राओं के कैंसिल होने से उनके समर्थकों और आयोजकों को जो कष्ट हुआ है, उसके लिए वो क्षमा चाहते हैं. हरीश रावत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि उनके कार्यक्रम की तर्ज पर पार्टी भी कोई जनसंवाद का कार्यक्रम बनाए और मैं उससे जुड़ूं. अभी प्रतीक्षा करूंगा.
प्रदेश प्रभारी ने जताई थी हरीश रावत के कार्यक्रमों पर आपत्ति: दरअसल, हरीश रावत बीमारी के चलते बीते काफी समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे, लेकिन जैसे ही हरीश रावत स्वस्थ हुए तो उन्होंने उत्तराखंड लौट कर सक्रिय राजनीति में आने का मन बनाया. हरीश रावत ने हरिद्वार से धन्यवाद और संवाद यात्रा शुरू की.
इस दौरान हरीश रावत ने एक बयान भी दिया था कि यदि उन्हें मौका मिलेगा तो वो हरिद्वार से चुनाव लड़ेंगे और यहां की जनता की सेवा करेंगे, ये उनकी आखिरी ईच्छा भी है. हरीश रावत के इन बयानों और कार्यक्रमों पर उत्तराखंड की कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने उन्हें चिट्टी लिखकर अपनी नाराजगी जताई.
हरीश रावत को दी गई हिदायत: कुमारी सैलजा ने अपने चिट्टी ने साफ किया था कि हरीश रावत पार्टी से अलग कोई निजी कार्यक्रम न करें. साथ ही ऐसे बयान भी न दे, जो पार्टी को नुकसान पहुंचे, लेकिन कुमारी सैलजा की नाराजगी पर हरीश रावत पर कोई असर नहीं पड़ा. हरीश रावत ने इसके बाद भी अपनी धन्यवाद और संवाद यात्रा जारी रखी. इसके बाद ये मामला दिल्ली तक पहुंचा और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा.
केसी वेणुगोपाल ने भी दी थी चेतावनी: इस दौरान केसी वेणुगोपाल से हरीश रावत से बात भी की और साफ किया कि उत्तराखंड में सभी नेताओं के साथ मिलकर कैंपन किया जाए, वो भी कांग्रेस के बैनर तले. इस कैंपेन का एकमात्र मकसद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी की जीत पक्की करना होना चाहिए. पार्टी अकेले कैंपेन बर्दाश्त नहीं करेगी. पार्टी संगठन के प्लान के मुताबिक ही मिलकर प्रोग्राम होने चाहिए. पार्टी को भरोसा है कि पूरी स्टेट यूनिट की एनर्जी और कड़ी मेहनत से कांग्रेस उत्तराखंड में जीत हासिल करेगी.
इस पूरे बवाल के बाद आज सात अक्टूबर हरीश रावत की दिल्ली में कुमार सैलाज से मिलना था, और उसके बाद आठ अक्टूबर को उनका केसी वेणुगोपाल से मिलने का कार्यक्रम था. हालांकि अभी इसकी जानकारी नहीं आ पाई है कि उनकी दिल्ली में कि नेताओं से मुलाकात हुई है.
