टांडा। बेटियों की सुरक्षा कितनी अहम है यह संदेश मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चिकित्सा विभाग और टांडा अस्पताल के उच्च अधिकारियों को दृढ़ता के साथ दिया है। यही वजह रही कि डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में जूनियर रेजिडेंट डाक्टर से छेड़छाड़ का मामला ध्यान में आते ही उन्होंने आरोपित लैब असिस्टेंट के निलंबन का आदेश देते हुए टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों और विभाग के उच्च अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
निलंबन के दौरान आरोपित का मुख्यालय हमीरपुर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल तय करने पर पीड़िता ने राहत की सांस ली है। दैनिक जागरण के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री को कहा-थैंक्यू सर…अब वह डरेंगी नहीं।
सीएम की सख्ती के बाद एक्शन
दो बेटियों के पिता मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के कड़े तेवरों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. गोपाल बेरी को रविवार को ही आरोपित लैब असिस्टेंट जोनी कुमार के निलंबन और जांच के आदेश जारी करने पड़े। हमीरपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है।
सुस्त रवैया सवालों के घेरे में
इस मामले से टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल ही नहीं, चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा के उच्च अधिकारियों का सुस्त रवैया भी प्रश्नों के घेरे में है। 28 सितंबर की घटना पर आरोपित के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई न होने से खफा रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन को एक अक्टूबर को धरने का अल्टीमेटम देना पड़ा। कार्रवाई के नाम पर टांडा प्रशासन ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पत्र लिखा, लेकिन वहां से भी दो और तीन अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बैठकें हुई पर निर्णय नहीं
हालांकि आंतरिक शिकायत समिति का गठन जरूर किया गया, जिसने लगातार बैठकें की, लेकिन निर्णय तक नहीं पहुंची। तीन अक्टूबर को आरडीए ने सुबह साढ़े नौ बजे से धरना शुरू कर दिया। साढ़े 11 बजे तक सुपरस्पेशिलिटी ब्लाक के बाहर धरना देने के बाद रेजिडेंट डाक्टर प्रशासनिक ब्लाक में पहुंच गए और आरोपित के निलंबन व तबादले पर अड़ गए तो आतंरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट उन्हें सौंपी गई। उन्होंने रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। आरडीए ने नई समिति गठित करने व उसमें आरडीए का प्रतिनिधि भी शामिल करने की मांग की है।
क्या आरोपित को कोई बचा रहा था
प्रश्न यह है कि जिस मामले का समाधान मुख्यमंत्री ने संज्ञान में आने के तुरंत बाद कर दिया उसे टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल प्रशासन ने पांच दिन तक क्यों लटकाए रखा? क्या आरोपित को कोई बचा रहा था? कार्रवाई तत्काल होती तो न प्रशिक्षु डाक्टर मानसिक पीड़ा झेलते, न वे हड़ताल करने पर बाध्य होते और न ही संस्थान बदनामी झेलता।
