चंपावत: बनबसा एनएचपीसी में आज धामी कैबिनेट की बैठक हुई. चंपावत जिले में आयोजित इस पहली बार कैबिनेट बैठक में दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस दौरान सीएम धामी ने कहा कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी.
उत्तराखण्ड में शासन को प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नई पहल की है. इसी क्रम में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चम्पावत जनपद के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई. चम्पावत जिले में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित हुई. बैठक में दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक में युवाओं को लेकर बड़े फैसले लिये गये. साथ ही डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने पर भी निर्णय हुआ है. इसके अलावा कुक्कुट पालकों को सब्सिडी देने पर भी मुहर लगी है.
बनबसा कैबिनेट के बड़े फैसले
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इन फैसलों परभी लगी मुहर: मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग (कृत्यों का परिसीमन) (संशोधन) विनियम, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी दी. इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल अधिकारी के पद को लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा, क्योंकि सेवा नियमावली के अनुसार यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है. मंत्रिमंडल ने तत्कालीन अधिष्ठान, उत्तराखण्ड के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी. इसके तहत 8 आरक्षी न.पु., 01 आरक्षी डकारनर तथा 02 आरक्षी चालक सहित कुल 11 पद समर्पित किए जाएंगे. नियोजन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 49 के अन्तर्गत अनुसूची-3 में संशोधन के प्रस्ताव को मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया. संशोधन के तहत स्वर्णिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश/मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित स्वर्णिक अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है.
मंत्रिमंडल ने वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक अथवा अपर्याप्त हो चुके उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को निरस्त करते हुए राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखण्ड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 को विधानसभा के पटल पर रखे जाने को मंजूरी दी. मंत्रिमंडल ने कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान वर्तमान सीबीडीसी/ई-रूपी आधारित व्यवस्था के स्थान पर आधार सीडेड/लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से डीबीटी द्वारा किए जाने को मंजूरी दी. मंत्रिमंडल ने पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभागों में आपसी समन्वय, पर्यवेक्षण, एकरूपता तथा प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए महानिदेशक का एक नवीन पद सृजित किए जाने को मंजूरी दी. इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुश्रवण तथा केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के बेहतर अभिकरण में सहायता मिलेगी.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी. इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा. सरकार का प्रयास है कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम हो तथा विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे.
सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है. इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जा रहा है.
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
सीएम धामी ने कहा प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने से स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की आवश्यकताओं को करीब से समझने में मदद मिलेगी. इससे क्षेत्र विशेष से जुड़े विषयों पर प्रभावी और त्वरित निर्णय लेने का मार्ग भी प्रशस्त होगा.
बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं मंत्रिमंडल के सदस्यों को देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं की अनमोल धरोहर ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई. यह चम्पावत के देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ढाल है. बग्वाल परंपरा में प्रयोग होने वाली यह पारंपरिक ढाल मुख्यतः बांस अथवा रिंगाल की खपच्चियों से छतरीनुमा आकार में तैयार की जाती है. मुख्यमंत्री एवं कैबिनेट मंत्रियों को यह पारंपरिक धरोहर भेंट किया जाना देवभूमि की लोक संस्कृति, परंपराओं और सीमांत क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के सम्मान का प्रतीक रहा.
