शिमला। हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए अब वेतन और वित्तीय लाभ भी मैदानी राज्यों से अलग तय करने की पैरवी शुरू हो गई है।
ऑल इंडिया सर्विस एसोसिएशन हिमाचल ने वीरवार को चंडीगढ़ में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई के समक्ष प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों का पक्ष रखते हुए हिमाचल के लिए विशेष वित्तीय प्रविधान की मांग उठाई।
चंडीगढ़ में 17-18 सितंबर को आयोजित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की कंसल्टेशन मीटिंग में हिमाचल की ओर से भौगोलिक परिस्थितियों को वेतन निर्धारण का अहम आधार बनाने पर जोर दिया गया।
एसोसिएशन ने कहा कि पहाड़ी राज्य में अधिकारियों और कर्मचारियों को दुर्गम, बर्फीले और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सेवाएं देनी पड़ती हैं। ऐसे में केवल सामान्य वेतनमान के आधार पर वित्तीय लाभ तय करना प्रदेश की वास्तविक परिस्थितियों के साथ न्याय नहीं होगा।
एसोसिएशन ने आयोग के समक्ष यह मांग रखी कि हिमाचल में सेवाएं देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को दिल्ली जैसे मैदानी क्षेत्रों में सेवाएं देने वालों की तुलना में अधिक वेतन और वित्तीय लाभ मिलना चाहिए।
विशेष रूप से आवागमन की कठिनाइयों और महंगी जीवन-यापन लागत को डीए तथा अन्य वित्तीय लाभ तय करते समय शामिल करने की पैरवी की गई।इसमें सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सी पाल रासु, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (ऑफ) आईएफएस संजीव सूद, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, आइएएस अधिकारी रितिका जिंदल और दिव्यांशु सिंघल तथा आईपीएस अधिकारी अशोक रत्न सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
आठवें वेतन आयोग के समक्ष हिमाचल की यह पैरवी ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी आगामी वेतन ढांचे में अपनी सेवा परिस्थितियों के अनुरूप वित्तीय लाभ की उम्मीद लगाए हुए हैं। आयोग के समक्ष रखे गए तर्कों में एक जैसा वेतन, अलग परिस्थितियां के बजाय हिमाचल की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को वित्तीय निर्धारण में महत्व देने पर जोर रहा।
