
पंजाब में शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता तरुण चुघ ने इस मुद्दे को लेकर भगवंत मान सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुघ का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। तरुण चुघ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि पंजाब सरकार के लिए अब जवाबदेही से बचने का समय खत्म हो गया है। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा उठाए गए मामले का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है और पंजाब के मुख्य सचिव को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। चुघ के मुताबिक, आयोग ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव से सात दिनों के भीतर इस मामले से जुड़े सभी साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही, सरकार द्वारा इस संबंध में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है। भाजपा नेता ने कहा कि शिक्षक भर्ती से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और पूरे मामले में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी वर्ग के अधिकार प्रभावित हुए हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
चुघ ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को संविधान द्वारा मिले अधिकारों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से आयोग के निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय में सभी दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षक भर्ती से जुड़े आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। फिलहाल, इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट और पंजाब सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर सबकी नजर बनी हुई है। आयोग की रिपोर्ट और सरकार के स्पष्टीकरण के बाद ही मामले में आगे की स्थिति और कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
