देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2017 के बाद से धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति देखने को मिली है। चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) से लेकर मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत विकसित हो रहे कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों तक—देवभूमि में आस्था का सैलाब लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
वर्ष 2017 में जहां चारधाम यात्रा पर लगभग 23 लाख तीर्थयात्री पहुंचे थे, वहीं 2023 और 2025 में यह संख्या 50 लाख से 56 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, ऑल वेदर रोड, ऑल-वेदर एयर कनेक्टिविटी और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के चलते उत्तराखंड आज दुनिया का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभरा है।
सीएम पुष्कर सिंह धानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में हमारी सरकार देवभूमि की पवित्रता, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निरंतर समर्पित है। 2017 के बाद से हमने केदारनाथ पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ मास्टर प्लान और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे महाप्रकल्पों पर तेजी से काम किया है। आज देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित हुई है। हमारा लक्ष्य केवल तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि इसके जरिए स्थानीय युवाओं को रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां देना है।
तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या: वर्ष 2017 में कुल चारधाम यात्रियों की संख्या लगभग 23.24 लाख थी। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 56.13 लाख तक पहुंचा, और चालू सत्र 2026 में भी यात्रा अपने शुरुआती महीनों में ही नए कीर्तिमान रच रही है।
चारधाम से इतर नए आध्यात्मिक केंद्र: मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम (1.74 लाख से अधिक यात्री), रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण (3.40 लाख से अधिक यात्री) और धारी देवी मंदिर में तीर्थयात्रियों की संख्या में दोगुना से अधिक का उछाल आया है। कैंची धाम में इस वर्ष केवल 6 महीनों में 24 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं, ऑल-वेदर रोड तथा हेली सेवाओं के विस्तार ने दुर्गम घाटियों की यात्रा को बेहद सुगम बना दिया है।
गुजरात से देवभूमि आए तीर्थयात्री रमेश पटेल ने कहा कि मैं 2016 में केदारनाथ आया था और अब 2026 में दोबारा आया हूं। सच मानिए, पूरा परिदृश्य ही बदल गया है! पहले जहां चलने में डर लगता था और सड़कें संकरी थीं, आज चौड़ी ऑल-वेदर सड़कें और केदारनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्मित प्रांगण देखकर मन आनंदित हो गया। व्यवस्थाएं बहुत ही शानदार हैं।
दिल्ली से आई श्रद्धालु सुनाता शर्मा ने कहा कि इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, टोकन सिस्टम और स्वास्थ्य सुविधाओं के इंतजाम बहुत ही सटीक हैं। प्रशासन और पुलिस का व्यवहार बहुत सहयोगी रहा। पहाड़ों पर इतनी भीड़ के बावजूद इतनी अच्छी व्यवस्था होना काबिले तारीफ है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिली संजीवनी
धार्मिक पर्यटन में आए इस अभूतपूर्व उछाल से स्थानीय होटल उद्योग, टूर-ट्रैवल, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों (ODOP) के कारोबार में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केदारनाथ-बद्रीनाथ में केवल टोकन, हेली सेवा, और स्थानीय परिवहन के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये का सीधा कारोबार स्थानीय लोगों को मिल रहा है। देवभूमि का यह विकास मॉडल आज ‘समृद्धि और संस्कृति’ के अनूठे मेल के रूप में पूरे देश के सामने एक मिसाल बन चुका है।
