लखनऊ। आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े, पर हमारी आस्था नहीं तोड़ सके। वह मूर्तियां तोड़ सकते हैं, पर मूल्य नहीं। वह मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ी कर सकते हैं, पर हमारे मन में बसे प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण को वो कभी छू भी नहीं पाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ का मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन हमने उसे बार-बार बनाया। अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बार-बार टूटा, पर आज वह अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है। काशी में भगवान विश्वनाथ का मंदिर कई बार टूटा, लेकिन लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे भव्य स्वरूप दिया।
ये चीजें हमें बताती हैं कि जिन लोगों ने हमें मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए। हमारा भारत आज भी जीवित व जागृत है और शाश्वत रूप से अपनी इस यात्रा को लेकर चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें योगेश्वर श्रीकृष्ण के उस शाश्वत संदेश के साथ जोड़ता है, जो पिछले पांच हजार वर्षों से सम और विषम परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन करता है।
श्रीकृष्ण का जन्म काल कोठरी (अंधकार) में हुआ, लेकिन उन्होंने जीवनभर परिस्थितियों को परास्त करते हुए समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया। यह किसी एक घटना के आधार पर नहीं, बल्कि कई घटनाएं जिन्हें हम अनुभव करते हैं। जब व्यक्ति भ्रम या संशय की स्थिति में होता है तो भगवान कृष्ण का संदेश भगवद्गीता के माध्यम से हर सनातनी का मार्गदर्शन करता है। उनका विराट व्यक्तित्व हम सभी को अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देता है।
इस मौके पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत, राज्यसभा सदस्य डा. दिनेश शर्मा, पूर्व मंत्री डा. महेंद्र सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, मुख्य सचिव एसपी गोयल व डीजीपी राजीव कृष्ण आदि मौजूद थे।
कर्मक्षेत्र में अपने आप को पहचानें
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश बताता है कि कर्मक्षेत्र में अपने आप को पहचानें और उसमें जो श्रेष्ठ हो, वह करने का प्रयास करें। आज पूरा देश नए भाव में आगे बढ़ने को उत्सुक है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए। विकसित भारत की संकल्पना तब साकार होगी, जब हर कोई अपने कर्मक्षेत्र में श्रेष्ठ करने के लिए अग्रसर होगा। इसके लिए आवश्यक है कि देशवासी अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निर्वहन करें।
सबका एक ही भाव है-भगवान के दर्शन
उन्होंने कहा कि कल से दोपहर तक वह वृंदावन और मथुरा में थे। लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े हैं। सबका एक ही भाव है कि भगवान के दर्शन करना है। यहां आज भी भगवान की स्मृतियां बसी हैं। यहां के लोग अनावश्यक रूप से प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाते।
सीएम ने कहा कि इंद्र अपनी पूजा कराना चाहते थे। श्रीकृष्ण ने कहा कि नहीं, जो किसानों और पशुपालकों को संरक्षण देता है, हमें उसकी पूजा करनी चाहिए। इसीलिए आज भी हम लोग गोवर्धन की पूजा कर रहे हैं। हमें किसी ऐसे व्यक्ति का पूजन नहीं करना चाहिए, जो अन्याय का प्रतीक हो।
