देहरादून: उत्तराखंड में साल 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं के लिए वित्तीय अपग्रेड से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है. 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कनिष्ठ अभियंताओं को प्रथम वित्तीय स्तरोन्नयन (Financial Upgradation) के रूप में पूर्व की भांति ग्रेड-पे 5400 यानी लेवल-10 का लाभ दिए जाने के मामले में गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक हुई. बैठक में कनिष्ठ अभियंताओं को इस लाभ का रास्ता निकालने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
दरअसल, उत्तराखंड शासन के वित्त विभाग की ओर से 31 अगस्त 2026 को इस मामले पर विचार के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित करने को मंजूरी दी गई थी. समिति की अध्यक्षता वन मंत्री को सौंपी गई है, जबकि पशुपालन मंत्री को समिति का सदस्य बनाया गया है. वित्त सचिव को समिति को सचिवीय सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है. मामला मुख्य रूप से 1 जनवरी 2014 के बाद विभागों में नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं से जुड़ा है.
शासन स्तर पर ऐसे कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद प्रथम वित्तीय स्तरोन्नयन के रूप में पूर्व की भांति ग्रेड-पे 5400 यानी लेवल-10 का लाभ दिए जाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. इसी उद्देश्य से मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है, ताकि मामले के सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का परीक्षण किया जा सके. इसी क्रम में हुई उपसमिति की बैठक में कनिष्ठ अभियंताओं के मामलों पर चर्चा की गई. बैठक में वित्त सचिव के साथ इस बात पर मंथन हुआ कि संबंधित कनिष्ठ अभियंताओं को यदि ग्रेड-पे 5400 का लाभ दिया जाता है तो इसकी प्रक्रिया किस तरह पूरी की जा सकती है.
साथ ही नियमों और वित्तीय प्रावधानों से जुड़ी संभावित तकनीकी दिक्कतों को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया. बैठक में यह भी देखा गया कि यदि सरकार कनिष्ठ अभियंताओं को इस वित्तीय लाभ का रास्ता साफ करती है तो राज्य के खजाने पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है. यानी केवल कर्मचारियों को लाभ देने की मांग पर ही नहीं, बल्कि इसके लिए जरूरी वित्तीय प्रबंधन और व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई.
सरकार के सामने चुनौती यह है कि कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर वित्तीय स्तरोन्नयन का लाभ देने की व्यवस्था को लागू करते समय मौजूदा नियमों, वेतन संरचना और वित्तीय दायित्वों का संतुलन कैसे बनाया जाए. यही वजह है कि इस मामले को सीधे तौर पर निर्णय लेने के बजाय मंत्रिमंडलीय उपसमिति के माध्यम से परीक्षण के लिए रखा गया है. फिलहाल बैठक के बाद कनिष्ठ अभियंताओं की नजर समिति की अगली कार्रवाई और संस्तुति पर है.
अभी इस प्रकरण पर बातचीत हुई है लेकिन निर्णय नहीं हो पाया है. ऐसे में अगली तारीख अधिकारियों को दी गई है ताकि सभी पहलुओं पर बात करने के बाद किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचा जा सके.
-सौरभ बहुगुणा, सदस्य, मंत्रिमंडलीय उपसमिति-
यदि तकनीकी अड़चनों का समाधान निकलता है और वित्तीय बोझ को लेकर सहमति बनती है, तो 2014 के बाद नियुक्त और 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कनिष्ठ अभियंताओं को ग्रेड-पे 5400 का लाभ मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि अंतिम फैसला मंत्रिमंडलीय उपसमिति की संस्तुति और शासन स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा. फिलहाल उप समिति ने इस पर विचार किया है लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने शासन के अधिकारियों को मामले से जुड़े बाकी तथ्यों और जानकारी के साथ अगली मीटिंग में पेश होने के लिए कहा गया है. हालांकि उप समिति को इस मामले में अंतिम निर्णय पर पहुंचते हुए अपनी संस्तुति देनी है जिसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. कैबिनेट के माध्यम से ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा.
