अधिकारियों, जेल कर्मचारियों और परा-विधिक स्वयंसेवकों सहित सभी संबंधित लोगों को संवेदनशील बनाने और उनकी क्षमता बढ़ाने की भी परिकल्पना की गई है, साथ ही कानूनी सेवा संस्थानों, पुलिस, जेल प्रशासन, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विभागों और दिव्यांग अधिकार संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया है।
इन दो पहलों की शुरुआत, हालसा की एक अहम संस्थागत प्रतिबद्धता को दिखाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरी, जानकारी की कमी या विकलांगता न्याय पाने में रुकावट न बनें। जहाँ “न्याय मित्र” का मकसद नागरिकों तक सीधे कानूनी सेवाएँ पहुँचाना है, वहीं अधिकारों पर आधारित एस0ओ0पी0 विकलांग लोगों के लिए सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करता है।
न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने सभी संबंधित लोगों से मिलकर ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिसमें हर नागरिक और हर विकलांग व्यक्ति की बात सुनी जाए, उन्हें सुरक्षा मिले और वे सशक्त हों, ताकि “न्याय सभी के लिए” के दृष्टिकोण एवं उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सके।
