न्याय को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिकों के हितार्थ बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, न्यायमूर्ति दीपक सिबल, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) ने आज दो बड़ी पहल शुरू की। ’’न्याय मित्र- न्याय आपके द्वार’’ तथा न्याय और दिव्यांग लोगों (जिनमें दिव्यांग कैदी भी शामिल हैं) की शिकायतों के समाधान, कानूनी सहायता और सुरक्षा के लिए एक मानक संचालक प्रक्रिया (एस0ओ0पी0) । ये दोनों पहल नागरिको ं तक कानूनी सेवाएँ पहुँचाकर और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए संस्थागत प्रणाली को मजबूत करके ’’न्याय सभी के लिए’’ के दृष्टिकोण के प्रति हालसा की प्रतिबद्धता को दोहराती हैं। ’’न्याय मित्र- न्याय आपके द्वार’’ के तहत, न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने चार मोबाइल कानूनी सेवाएं वैनों को हरी झंडी दिखाई। इन्हें कानूनी सेवा संस्थानों के विस्तार के तौर पर तैयार किया गया है ताकि न्याय की पहुँच अंतिम छोर तक हो सके। ये गाड़ियाँ पूरे राज्य में तय ’’जस्टिस सर्किट’’ के जरिए मोबाइल कानूनी सेवा क्लीनिक के तौर पर काम करेंगी। दूर-दराज और मुश्किल पहुँच वाले गाँवों, ग्रामीण इलाकों, विकास खण्डों, औद्योगिक क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और अन्य वंचित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मोबाइल कानूनी सेवाएं वैन नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता, कानूनी मार्गदर्शन, मुकदमंे से पहले की सलाह, पीड़ित मुआवजा दावों में मदद, ऐ0डी0आर0 सेवाएँ, टेली-लॉ परामर्श और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद देंगी। वे कानूनी जागरूकता और कानूनी साक्षरता से जुड़ी गतिविधियाँ भी करेंगी, खासकर महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, औद्योगिक श्रमिकों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए। मोबाइल टीमों को पैनल अधिवक्ता, परा-विधिक स्वयंसेवक और अन्य हितधारकों का सहयोग मिलेगा, ताकि प्रभावी सहायता और फॉलो-अप (अनुसरण) सुनिश्चित किया जा सके। इसी मौके पर, न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने दिव्यांग लोगों (जिनमें दिव्यांग
कैदी भी शामिल हैं) के लिए शिकायत निवारण, कानूनी सहायता और सुरक्षा के लिए एक मानक संचालक प्रक्रिया (एस0ओ0पी0) का शुभारम्भ किया। इसका उददेश्य दुर्व्यवहार, हिंसा और शोषण से जुड़ी शिकायतो ं के समाधान के लिए एक समान, सुलभ, अधिकारों पर आधारित और जवाबदेह निकाय बनाना है। यह एस0ओ0पी0 ’’दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’’ की धारा 7 को व्यावहारिक रूप देती है और यह सुनिश्चित करती है कि ऐसी शिकायतों को निजी, आपसी या पारिवारिक झगड़ों के तौर पर मामूली न आंका जाए, बल्कि उन्हें कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों के तौर पर देखा जाए। इसमें मुफ्त और समय पर कानूनी सहायता, संस्थागत तालमेल और लगातार कानूनी जागरूकता व क्षमता-निर्माण पर जोर दिया गया है।
इस एस0ओ0पी0 की एक मुख्य विशेषता दिव्यांग लोगों को कानूनी सहायता देने के लिए जिला-स्तरीय कोर टीम (केन्द्रीय समूह) का गठन है। इस टीम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव और जिला प्रशासन, पुलिस, जेल, समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, साथ ही दिव्यांग अधिकारों के विशेषज्ञ, सरकारी अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता और परा-विधिक स्वयंसेवक भी होंगे। यह कोर टीम शिकायत निवारण, कानूनी सहायता, जागरूकता, जेल के दौरे, सुलभता और सुरक्षा उपायों की निगरानी, और पुनर्वास व समाज में फिर से शामिल करने जैसे कामों में मदद करेगी। शिकायत पीड़ित व्यक्ति, देखभाल करने वालों, प्रतिनिधियों, एन0जी0ओ0 या दुर्व ्यवहार या शोषण की जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा की जा सकती है, जबकि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण स्वयं भी मामले का संज्ञान ले सकते हैं। शिकायतों को केवल औपचारिकता की कमी, दस्तावेजों की कमी या बातचीत में बाधाओं के कारण खारिज नहीं किया जा सकता है, और किसी भी चरण में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इस एस0ओ0पी0 में दिव्यांग कैदियो ं के लिए विशेष सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं, जैसे दिव्यांगता की पहचान, जेल कानूनी सहायता क्लीनिक को मजबूत करना, सुलभ जेल अवसंरचना, उचित चिकित्सा देखभाल और सहायक उपकरण, नियमित कानूनी सलाह और प्रतिनिधित्व, समय-समय पर जेल के दौरे, सुलभ बातचीत और उचित व्यवस्था। इसमें न्यायाधीशों, पैनल अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियो ं, जेल कर्मचारियों और परा-विधिक स्वयंसेवकों सहित सभी संबंधित लोगों को संवेदनशील बनाने और उनकी क्षमता बढ़ाने की भी परिकल्पना की गई है, साथ ही कानूनी सेवा संस्थानों, पुलिस, जेल प्रशासन, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विभागो ं और दिव्यांग अधिकार संगठनो ं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया है। इन दो पहलों की शुरुआत, हालसा की एक अहम संस्थागत प्रतिबद्धता
को दिखाती है। इसका उददेख्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरी, जानकारी की कमी या विकलांगता न्याय पाने में रुकावट न बने ं। जहाँ ’न्याय मित्र ’ का मकसद नागरिकों तक सीधे कानूनी सेवाएँ पहुँचाना है, वहीं अधिकारों पर आधारित एस0ओ0पी0 विकलांग लोगों के लिए सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करता है। न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने सभी संबंधित लोगों से मिलकर ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिसमें हर नागरिक और हर विकलांग व्यक्ति की बात सुनी जाए, उन्हें सुरक्षा मिले और वे सशक्त हों, ताकि ’’न्याय सभी के लिए’’ के दृष्टिकोण एवं उददेश्य को आगे बढ़ाया जा सके।
