शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों तक लटकाने वाली व्यवस्था पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। अधूरी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) फाइलें भेजे जाने और बार-बार कमियां सामने आने पर हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) की नाराजगी के बाद कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को प्रक्रिया दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अब डीपीसी प्रस्ताव पूरी तैयारी और निर्धारित चेकलिस्ट के साथ ही आयोग को भेजने होंगे।
नियमों की समीक्षा के निर्देश
पदोन्नति की पात्रता में एकरूपता लाने के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग की व्यवस्था के अनुरूप हर भर्ती वर्ष के लिए पहली जनवरी को क्रुशियल डेट माना जाएगा। साथ ही 1980 और 1990 के दशक से चले आ रहे भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। अप्रासंगिक हो चुके नियमों में संशोधन या उन्हें निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
कई विभाग तय समयसारिणी अनुसार नहीं भेज रहे डीपीसी
सरकार के संज्ञान में आया है कि कई विभाग निर्धारित समय-सारणी के अनुसार डीपीसी प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं। आयोग में पहुंचने वाली फाइलों में एपीएआर समेत जरूरी दस्तावेजों की कमियां रहती हैं। ऐसे प्रस्ताव सुधार के लिए बार-बार विभागों को लौटाने पड़ते हैं, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया लंबी खिंचती है। कई मामलों में पात्र अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति का लाभ लिए बिना सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष के साथ मुकदमेबाजी भी बढ़ रही है।
अनुभाग अधिकारी ही जमा कराएगा फाइल
नई व्यवस्था में संबंधित प्रशासनिक विभाग का अनुभाग अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारी डीपीसी प्रस्ताव आयोग के सर्विस सेक्शन में हाथोंहाथ जमा कराएगा। आयोग में प्रस्ताव की मौके पर जांच होगी। चेकलिस्ट के अनुसार दस्तावेज पूरे न होने पर फाइल वहीं वापस की जा सकेगी। इससे अधूरी फाइलों के आने-जाने में लगने वाला समय बचाने का प्रयास है।
एक वर्ष की रिक्तियों का एक ही प्रस्ताव
एक ही कैलेंडर वर्ष की रिक्तियों के लिए अलग-अलग डीपीसी प्रस्ताव भेजने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी। अब संबंधित वर्ष की सभी रिक्तियों का एक समेकित प्रस्ताव भेजने पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य डीपीसी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
