देहरादून: हरिद्वार कुंभ के दौरान आपात हालातों से निपटने के लिए जल्द SOP तैयार की जाएगी. खास बात यह है कि इसके लिए सभी विभाग अपने सुझाव देंगे. इसी आधार पर मॉक ड्रिल भी की जाएगी. करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. आयोजन से जुड़ी शुरुआती तैयारियां पूरी होने के बाद अब अंतिम चरण के कामों को फाइनल किया जा रहा है.
हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के साथ होगी. करीब तीन महीने तक चलने वाला यह आयोजन 14 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा. इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है. गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करोड़ों में होने के कारण प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन से लेकर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तक कई बड़ी चुनौतियां रहेंगी.
आपात हालात से निपटने पर फोकस: कुंभ जैसे बड़े आयोजन में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच किसी भी तरह की आपात स्थिति पैदा न हो, आगजनी, भगदड़, दुर्घटना या किसी अन्य अप्रत्याशित घटना की स्थिति में यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो हालात गंभीर हो सकते हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन की ओर से पहले से ही आपात परिस्थितियों से निपटने की रणनीति तैयार की जा रही है.
इसी क्रम में कुंभ के दौरान संभावित आपात हालात से निपटने के लिए बाकायदा एक विशेष एसओपी तैयार की जा रही है. इस एसओपी में अलग-अलग परिस्थितियों में संबंधित विभागों की भूमिका, जिम्मेदारियां और कार्रवाई का पूरा खाका तय किया जाएगा. कोशिश यह है कि किसी भी आपात स्थिति में अधिकारी और संबंधित टीमें बिना समय गंवाए तत्काल कार्रवाई कर सकें.
सभी विभाग देंगे अपने सुझाव: एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर उत्तराखंड शासन में एक बैठक भी आयोजित की गई. इसमें कुंभ से जुड़े अधिकारियों के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए. बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि आपात परिस्थितियों के दौरान किन-किन बिंदुओं को एसओपी में शामिल किया जाए. अलग-अलग विभाग किस तरह एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे.
बताया जा रहा है कि एसओपी को केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रखा जाएगा. कुंभ से जुड़े सभी प्रमुख विभाग अपने अनुभव और सुझाव देंगे. इसके आधार पर आपात स्थिति में तत्काल निर्णय लेने और कार्रवाई करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा.
मॉक ड्रिल से परखी जाएगी तैयारी: एसओपी तैयार होने के बाद इसकी वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगिता को भी परखा जाएगा. इसके लिए अलग-अलग आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मॉक ड्रिल कराने की योजना है. मॉक ड्रिल के जरिए यह देखा जाएगा कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से मौके पर पहुंचते हैं. राहत और बचाव कार्य किस तरह शुरू होता है. विभिन्न विभागों के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहता है.
प्रशासन का उद्देश्य केवल कागजों पर एसओपी तैयार करना नहीं, बल्कि उसे जमीन पर लागू करने की पूरी तैयारी करना है. मॉक ड्रिल के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर कर अंतिम एसओपी में जरूरी बदलाव किए जाएंगे.
करोड़ों की भीड़ के बीच चुनौती बड़ा आयोजन: कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए हरिद्वार में यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और भीड़ प्रबंधन जैसे मोर्चों पर भी सरकारी मशीनरी को लगातार सक्रिय रहना होगा. खास तौर पर प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान अचानक बढ़ने वाली भीड़ प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
हरिद्वार मेलाधिकारी सोनिका ने बताया फिलहाल सभी संबंधित विभागों से चर्चा की गई है. जिसमें सभी ने अपने सुझाव रखे हैं कोशिश की जा रही है कि जल्द ही इसके लिए SOP तैयार कर ली जाए. जिससे कुंभ के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी रहे.
