चंडीगढ़। हरियाणा में एकाकी जीवन जी रहे बुजुर्गों की सुध अब सरकार खुद लेगी। बुजुर्गों को घर-द्वार पर देखभाल के लिए देखभाल सहायक (केयर गिवर्स) तैयार किए जाएंगे। पहले चरण में वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर देखभाल और प्राथमिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए 1000 देखभाल सहायक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पहल उस बदलती सामाजिक परिस्थिति का जवाब है, जहां कई वरिष्ठ नागरिकों को घर पर ही नियमित देखभाल और सहयोग की आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समाज की सबसे अनुभवी पीढ़ी के लिए नई सोच के साथ कदम बढ़ाते हुए सभी शहर और कस्बों में वरिष्ठ नागरिक कल्याण क्लब स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी सहायता देना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक जुड़ाव, सम्मान और सुरक्षा का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके पीछे स्पष्ट संदेश है कि वरिष्ठ नागरिक समाज पर बोझ नहीं, बल्कि अनुभव और संस्कारों की अमूल्य धरोहर हैं।
वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की इस नई व्यवस्था को मजबूत आधार देने के लिए विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय और ओपी जिंदल विश्वविद्यालय को प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन संस्थानों में दो चरणों में 500-500 प्रशिक्षुओं को तैयार करने की योजना बनाई गई है। प्रशिक्षण में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यानी एक पहल से दो उद्देश्य पूरे करने की कोशिश है। पहला, वरिष्ठ नागरिकों को प्रशिक्षित देखभालकर्ता उपलब्ध कराना और दूसरे युवाओं तथा महिलाओं के लिए नए कौशल एवं रोजगार के अवसर पैदा करना।
मुख्यमंत्री कहते हैं कि सरकार का फोकस केवल सहायता देने पर नहीं, बल्कि लोगों को सम्मानजनक और बेहतर जीवन देने पर है। महिलाओं को आर्थिक सहारा, वरिष्ठ नागरिकों को घर पर देखभाल, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और नशे से प्रभावित लोगों को पुनर्वास का अवसर, इन पहलों में एक साझा सूत्र दिखाई देता है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ हरियाणा को भी एक विकसित और सशक्त राज्य के रूप में आगे ले जाना है। इस यात्रा में विकास का अर्थ केवल सड़क, भवन और उद्योग तक नहीं, बल्कि ऐसा समाज भी है जहां महिला आर्थिक रूप से मजबूत हो, बुजुर्ग सम्मान के साथ जीवन जी सकें और नशे से प्रभावित युवा को वापस मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिले।
नशामुक्ति के लिए कुरुक्षेत्र में बनेगा उत्कृष्टता केंद्र
नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने केवल कार्रवाई और रोकथाम तक सीमित रहने के बजाय उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की रणनीति बनाई है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी माडल के माध्यम से नशामुक्ति के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाया जाएगा, जिसके लिए कुरुक्षेत्र में स्थल का निरीक्षण किया जा चुका है। इस केंद्र का उद्देश्य नशे से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें दोबारा सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ना होगा।
