चंडीगढ़। करनाल के बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद हुए पुलिस एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों के बीच हरियाणा सरकार ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर अब मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी। इसकी जिम्मेदारी एडीजीपी कानून व्यवस्था संजय कुमार को सौंपी गई है। संजय कुमार की गिनती राज्य के सुलझे हुए आईपीएस अधिकारियों में होती है।
सरकार के इस फैसले को मामले से जुड़े सभी पक्षों के बीच भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीरू वाल्मीकि की हत्या के बाद पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के दौरान एनकाउंटर हुआ था।
इसके बाद एनकाउंटर की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर रोड समाज की ओर से सवाल उठाए गए। समाज के प्रतिनिधियों ने विधानसभा अध्यक्ष एवं घरौंडा के विधायक हरविन्द्र कल्याण के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी। उनका कहना था कि मामले के सभी पहलुओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पुलिस की भूमिका पर चर्चा
मामले को लेकर विपक्ष ने भी इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया हुआ है। करनाल के विधायक जगमोहन आनंद की ओर से समय पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने संबंधी बयान भी विवाद का हिस्सा बना। उनके बयान को अलग-अलग संदर्भों में पेश किए जाने के बाद पुलिस और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
लगातार उठ रहे सवालों और समाज की मांग को देखते हुए सरकार ने पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखते हुए जांच का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री का यह कदम इस मायने में अहम है कि अब किसी भी पक्ष की धारणा के बजाय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ होगी।
अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में होगी तथ्यात्मक पड़ताल
क्राइम ब्रांच की जांच का नेतृत्व एडीजीपी संजय कुमार करेंगे। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में होने वाली जांच में हत्याकांड के बाद की घटनाओं, पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर की परिस्थितियों और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और अन्य पक्षों से जानकारी लेकर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जाएगा।
सरकार के फैसले का उद्देश्य किसी एक पक्ष के पक्ष या विपक्ष में जाना नहीं, बल्कि सच्चाई को तथ्यों के आधार पर सामने लाना और सभी पक्षों को न्याय का भरोसा देना है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ और पुलिस कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं।
मुख्यमंत्री के इस फैसले से रोड समाज की कुछ समय से चली आ रही निष्पक्ष जांच की मांग पर भी कार्रवाई हुई है। अब निगाहें क्राइम ब्रांच की जांच पर हैं। माना जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में होने वाली पड़ताल से मामले को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगेगा और तथ्य सामने आने के साथ विवाद का समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
