चंडीगढ़: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त होने के बाद राज्यसभा सांसद श्री संजय भाटिया ने आज पानीपत में केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल जी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लिया। इस अवसर पर श्री संजय भाटिया ने केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल जी को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी साझा की और नई जिम्मेदारी के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
मनोहर लाल जी ने श्री संजय भाटिया को राष्ट्रीय महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं देते हुए संगठन के प्रति इसी समर्पण, निष्ठा और कर्मठता के साथ कार्य करने का आशीर्वाद दिया। दोनों नेताओं की यह आत्मीय मुलाकात संगठन के प्रति विश्वास, स्नेह और लंबे सांगठनिक संबंधों की भावनात्मक झलक भी बनी।
संगठन को लक्ष्य में बदलने और लक्ष्य को परिणाम में बदलने की पहचान
संजय भाटिया की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता संगठनात्मक लक्ष्य को स्पष्ट रणनीति में बदलना और कार्यकर्ताओं की सामूहिक शक्ति के माध्यम से उसे परिणाम तक पहुंचाना रही है। वे लो-प्रोफाइल रहकर संगठन के काम को प्राथमिकता देने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। विभिन्न राज्यों में पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने पर विशेष जोर दिया। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने समय-समय पर उन्हें हरियाणा से बाहर भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक और चुनावी जिम्मेदारियां सौंपीं। पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी के काम से जुड़े अनुभव ने उनके संगठनात्मक दायरे को प्रदेश की सीमाओं से आगे राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार दिया।
करनाल लोकसभा चुनाव की ऐतिहासिक जीत बनी राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण अध्याय
संजय भाटिया के राजनीतिक सफर में वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने करनाल लोकसभा सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को 6,56,142 मतों के अंतर से पराजित किया था। यह हरियाणा के लोकसभा चुनावी इतिहास में सबसे बड़े जीत अंतर के रूप में दर्ज हुआ। यह जीत केवल चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके व्यापक जनसंपर्क, संगठनात्मक तैयारी और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बनी। लोकसभा सांसद के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय विकास, आधारभूत ढांचे, रेलवे, सड़क, उद्योग, युवाओं और किसानों से जुड़े विषयों को संसद में उठाने का प्रयास किया।
2024 में संगठन को प्राथमिकता, 2026 में राज्यसभा और अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी द्वारा करनाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद संजय भाटिया ने संगठनात्मक भूमिका को प्राथमिकता दी। इसके बाद भी उनका राजनीतिक और संगठनात्मक सक्रियता का सिलसिला जारी रहा। मार्च 2026 में भाजपा ने उन्हें हरियाणा से राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया और वे निर्वाचित हुए। उन्होंने अप्रैल 2026 में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। वर्तमान में वे उच्च सदन के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक जीवन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यसभा सदस्य के साथ राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व मिलने से उनके अनुभव का उपयोग व्यापक स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने में किया जा सकेगा।
छात्र जीवन से शुरू हुआ संगठनात्मक सफर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा
संजय भाटिया का सार्वजनिक जीवन लंबे संगठनात्मक अनुभव से निर्मित हुआ है। पानीपत में 29 जुलाई 1967 को जन्मे संजय भाटिया छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हुए। 1980 के दशक में मंडल स्तर से संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने मंडल अध्यक्ष, युवा मोर्चा के विभिन्न दायित्व, जिला स्तर की जिम्मेदारियां और प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 2015 से 2021 तक वे भाजपा हरियाणा के प्रदेश महासचिव रहे। हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। मंडल से लेकर जिला, प्रदेश और अब राष्ट्रीय संगठन तक का उनका सफर भाजपा की उस कार्यकर्ता-आधारित संगठनात्मक व्यवस्था को रेखांकित करता है जिसमें लंबे समय तक निरंतर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर आगे बढ़ाया जाता है।
चुनावी प्रबंधन में अनुभव बना राष्ट्रीय जिम्मेदारी की बड़ी वजह
संजय भाटिया की पहचान केवल जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन के अनुभवी चेहरे के रूप में भी बनी है। हरियाणा के चुनावों के अलावा उन्हें विभिन्न राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारियां मिलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रबंधन से लेकर गुजरात, असम और जम्मू-कश्मीर में संगठनात्मक कार्य तथा कर्नाटक में विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी तक उनके अनुभव का दायरा लगातार बढ़ता गया। कठिन परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने की उनकी क्षमता को पार्टी नेतृत्व ने लगातार महत्व दिया। कर्नाटक चुनाव के दौरान तुमकुर जिले की गुब्बी विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी उन्होंने पार्टी के चुनावी एवं संगठनात्मक कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत- इसी सोच के साथ काम करने की शैली
संजय भाटिया की संगठनात्मक शैली में कार्यकर्ता केंद्र में रहा है। बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, वरिष्ठ नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने तथा प्रत्येक जिम्मेदारी को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर उनका विशेष जोर रहा है। उनकी यही कार्यशैली उन्हें ऐसे संगठनात्मक नेताओं की श्रेणी में रखती है जो मंच पर दिखाई देने से अधिक संगठन की जमीन पर काम करने को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक ऐसे नेता की बनी है जो जिम्मेदारी मिलने के बाद लगातार क्षेत्र में रहकर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने में विश्वास रखते हैं।
