चंडीगढ़: हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और आम लोगों तक बेहतर इलाज की सुविधाएं पहुंचाने के सरकारी प्रयासों के बीच प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च के आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमानों के अनुसार, 2018-19 में हरियाणा में प्रति व्यक्ति अपनी जेब से स्वास्थ्य खर्च 2,193 रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 2,923 रुपये हुआ। यह आंकड़ा मौजूदा कीमतों पर आधारित है और इसमें महंगाई का प्रभाव भी शामिल है।
इन आंकड़ों को केवल खर्च बढ़ने के रूप में देखने के बजाय हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच के व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा सकता है। राज्य सरकार लगातार सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने पर जोर दे रही है।
इलाज की पहुंच बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
हरियाणा सरकार के सामने चुनौती केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रदेश के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की है। इसी दिशा में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक, बेहतर जांच सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को अपने जिले और प्रदेश में ही उपचार की सुविधाएं मिल रही हैं। इसका सीधा लाभ उन परिवारों को मिलता है, जिन्हें पहले गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़े शहरों या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।
आयुष्मान योजना बनी आर्थिक सुरक्षा का आधार
हरियाणा में केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों को इलाज के खर्च से राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी योजनाएं गंभीर बीमारियों के उपचार में गरीब और पात्र परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बनी हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के जरिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर जोर है।
इसका उद्देश्य केवल बीमारी के बाद इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था को इस तरह विकसित करना है कि लोगों को समय पर जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल सके।
हरियाणा का खर्च राष्ट्रीय आंकड़े से अधिक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति जेब से स्वास्थ्य खर्च 2018-19 में 2,155 रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 2,767 रुपये हो गया। हरियाणा में 2022-23 में यह आंकड़ा 2,923 रुपये रहा।
हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि सभी आंकड़े मौजूदा कीमतों पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें महंगाई को समायोजित करने के बाद स्वास्थ्य खर्च में वास्तविक वृद्धि नहीं माना जा सकता।
पड़ोसी राज्यों में भी स्वास्थ्य खर्च बढ़ा
हरियाणा के साथ-साथ पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में वृद्धि हुई है। पंजाब में यह खर्च 3,065 रुपये से बढ़कर 3,829 रुपये और हिमाचल प्रदेश में 3,180 रुपये से बढ़कर 4,047 रुपये हो गया।
इससे स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ना केवल हरियाणा तक सीमित प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग और चिकित्सा खर्च में व्यापक बदलाव आया है।
सरकार का जोर स्वास्थ्य को जेब पर बोझ नहीं, अधिकार बनाने पर
स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी कसौटी यही है कि नागरिकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले और बीमारी परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर न करे। हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य नीति इसी व्यापक लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार, स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना, आधुनिक चिकित्सा ढांचे को मजबूत करना और प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मजबूत आधार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा के आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में स्वास्थ्य पर लोगों का खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में हरियाणा के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करना भविष्य की बड़ी प्राथमिकता होगी।
राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ यदि सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार, जांच और दवाइयों की उपलब्धता लगातार बढ़ती है, तो लोगों की निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।
इस लिहाज से प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च के आंकड़ों को हरियाणा सरकार के सामने मौजूद चुनौती के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की अगली दिशा तय करने वाले संकेत के रूप में देखा जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उनके नजदीक मिलें और गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक परेशानी कम से कम हो।
