
वाराणसी:- झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों ने बुधवार को एक दिवसीय उपवास किया। छात्रसंघ भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों ने झारखंड के आंदोलनरत विद्यार्थियों के प्रति एकजुटता जताई और पुलिस कार्रवाई की निंदा की। छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि विद्यार्थियों की समस्याओं और मांगों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद शुरू हुआ उपवास
उपवास कार्यक्रम की शुरुआत छात्रसंघ भवन परिसर में स्थित चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद छात्र सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपवास पर बैठे। इस दौरान छात्रों ने झारखंड में आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में नारे लगाए और उनके साथ एकजुटता का संदेश दिया।
लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप
बीएचयू छात्रों ने आरोप लगाया कि झारखंड में अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने वाले विद्यार्थियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। छात्रों का कहना था कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जिससे कई विद्यार्थी घायल हुए। छात्रों ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
‘पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो’
कार्यक्रम के दौरान अभिषेक सिंह ने कहा कि झारखंड में छात्रों पर जिस तरह कथित तौर पर लाठीचार्ज किया गया, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बीएचयू के छात्र झारखंड के विद्यार्थियों की मांगों के समर्थन में उनके साथ खड़े हैं। अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बातचीत से समाधान निकालने की अपील
बीएचयू छात्रों ने कहा कि छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
‘उपवास राजनीतिक नहीं, छात्र हित में’
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया कि एक दिवसीय उपवास किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आयोजित किया गया। छात्रों ने उम्मीद जताई कि संबंधित प्रशासन झारखंड के आंदोलनरत विद्यार्थियों की मांगों को गंभीरता से सुनेगा, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराएगा और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
