
भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर उर्फ एचएस भुल्लर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने नियमित जमानत के लिए दाखिल उनकी दूसरी लगातार याचिका भी खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने जमानत से इनकार करते हुए कहा कि मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी बाकी है। ऐसे में याचिकाकर्ता के पुलिस विभाग में वरिष्ठ पद को देखते हुए गवाहों को प्रभावित करने या धमकाने की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामला कथित रिश्वत मांगने और लेने से जुड़ा है। अदालत के आदेश के अनुसार, एक बातचीत में भुल्लर ने कृष्णानु नामक व्यक्ति को शिकायतकर्ता से आठ लाख रुपये लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 15 अक्टूबर 2025 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जांच एजेंसी ने जाल बिछाया। इसी दौरान कृष्णानु को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ लिया गया।
कृष्णानु की गिरफ्तारी के बाद उसी दिन निलंबित डीआईजी एचएस भुल्लर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ भुल्लर पर रिश्वत मांगने की साजिश में भूमिका होने के आरोप सामने आए। भुल्लर की ओर से हाईकोर्ट में जमानत के पक्ष में कई दलीलें दी गईं। बचाव पक्ष ने कहा कि वह तीन दशक से अधिक समय तक पुलिस सेवा में रह चुके हैं और अब सेवानिवृत्ति के करीब हैं। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आगे की जांच के लिए उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। उनकी ओर से किसी तरह की बरामदगी नहीं होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई। याचिका में यह तर्क भी दिया गया कि भुल्लर निलंबित हैं, इसलिए उनके पास अब अपने पद का इस्तेमाल करके गवाहों को प्रभावित करने की कोई वास्तविक संभावना नहीं है। इसके अलावा बचाव पक्ष ने सीबीआई के इस मामले में अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी।
वहीं, सीबीआई ने नियमित जमानत का जोरदार विरोध किया। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि भुल्लर के खिलाफ उपलब्ध बातचीत, व्हाट्सऐप रिकॉर्ड और सत्यापन के दौरान की गई नियंत्रित कॉल से कथित रिश्वत की मांग प्रथमदृष्टया सामने आती है। सीबीआई ने यह भी दलील दी कि भुल्लर की पिछली जमानत याचिका गुण-दोष के आधार पर खारिज की जा चुकी है। मौजूदा याचिका में ऐसी कोई बड़ी या ठोस परिस्थितिगत बदलाव नहीं हुआ है, जिसके आधार पर उन्हें दोबारा जमानत दी जाए। हाईकोर्ट ने सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को लेकर भुल्लर की दलील को भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पंजाब सरकार की ओर से छह नवंबर 2020 को सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस लिए जाने के तथ्य पर गौर किया।
हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले में भुल्लर और सह-आरोपित की गिरफ्तारी चंडीगढ़ में हुई थी। मामले की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा भी चंडीगढ़ में हुआ था। इसी आधार पर सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को लेकर उठाई गई आपत्ति को स्वीकार नहीं किया गया। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि भुल्लर पहले इन्हीं मुद्दों को लेकर दायर अपनी रिट याचिका वापस ले चुके हैं। ऐसे में इस स्तर पर सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को लेकर उनकी दलील को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की आगामी गवाही और आरोपी के पुलिस विभाग में वरिष्ठ पद को देखते हुए गवाहों पर संभावित प्रभाव को गंभीरता से लिया। इसी आधार पर अदालत ने नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद निलंबित डीआईजी एचएस भुल्लर की मुश्किलें फिलहाल बनी हुई हैं। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही पर अब निगाहें रहेंगी।
