देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद प्रदेश के सभी मंडल अध्यक्षों के साथ संवाद करने जा रहे हैं। भाजपा का मानना है कि सत्ता का रास्ता बूथ से होकर गुजरता है और पार्टी का मंडल अध्यक्ष उस रास्ते की सबसे मजबूत कड़ी है। इसीलिए मंडल अध्यक्षों से सीएम धामी के संवाद को राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंडल अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों का रिपोर्ट कार्ड रखकर कमियों को दूर करने का तरीका भी बताएंगे।
दरअसल, 2022 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के संगठनात्मक विश्लेषण में करीब 3,000 ऐसे बूथ चिह्नित किए थे, जहां पार्टी बढ़त नहीं ले सकी थी। अब इन्हीं बूथों को 2027 की रणनीति का केंद्र बनाया जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य हर कमजोर बूथ को मजबूत बनाकर विधानसभा स्तर पर बढ़त सुनिश्चित करना है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री धामी मंडल अध्यक्षों से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का विस्तृत राजनीतिक फीडबैक लेंगे।
सरकार की योजनाओं का जमीनी असर, जनता की अपेक्षाएं, विपक्ष की सक्रियता, स्थानीय मुद्दे, संगठन की मजबूती, बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता, नए मतदाताओं तक पहुंच, इंटरनेट मीडिया नेटवर्क तथा युवा और महिला मोर्चा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र के विधायक का भी जमीनी रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। मंडल अध्यक्षों से जनप्रतिनिधि के जनता का स्पष्ट फीडबैक लिया जाएगा।
बैठक में उन विधानसभा क्षेत्रों का विश्लेषण भी होगा, जहां पिछली बार मुकाबला बेहद करीबी रहा। अल्मोड़ा सीट पर भाजपा महज 127 वोट से चुनाव हार गई थी, जबकि द्वाराहाट में हार का अंतर केवल 182 वोट रहा। वहीं श्रीनगर व टिहरी जैसी सीटों पर जीत का अंतर भी एक हजार वोट से कम रहा। ऐसी सीटों पर सीएम धामी मंडल अध्यक्षों से विशेष चर्चा करेंगे।
भाजपा की समीक्षा में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया कि कुछ सीटों में पार्टी अधिकांश बूथों पर बढ़त लेने के बावजूद विधानसभा सीट नहीं जीत सकी। इसलिए भाजपा का जोर अब केवल बूथ जीतने पर नहीं बल्कि हर बूथ पर वोटों का अंतर बढ़ाने पर है। साथ ही संगठन यह भी परखेगा कि जिन क्षेत्रों में विधायक हैं, वहां उनके प्रदर्शन का चुनावी लाभ पार्टी को मिल रहा है या नहीं, ताकि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
