
हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली लोड से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब उपभोक्ता अपनी स्वीकृत बिजली लोड को आवश्यकता के अनुसार अस्थायी रूप से कम करा सकेंगे और भविष्य में जरूरत बढ़ने पर तीन वर्ष के भीतर बिना नया सर्विस कनेक्शन चार्ज दिए उसे पहले के स्तर तक दोबारा बहाल करा सकेंगे। आयोग का मानना है कि यह व्यवस्था विशेष रूप से औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और मौसमी मांग वाले उपभोक्ताओं के लिए काफी लाभकारी साबित होगी। कई उद्योगों और कारोबारों में पूरे वर्ष समान बिजली की जरूरत नहीं रहती, ऐसे में अब उन्हें अनावश्यक लोड बनाए रखने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। नए नियमों के लागू होने से उपभोक्ता अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार बिजली लोड का प्रबंधन कर सकेंगे। मांग कम होने पर लोड घटाने और बाद में बिना अतिरिक्त सर्विस कनेक्शन शुल्क के उसे दोबारा बढ़ाने की सुविधा से बिजली खर्च और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों में राहत मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा बिजली नियामक आयोग द्वारा 22 जुलाई को अधिसूचित इन संशोधनों को हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित किए जाने के बाद पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। बिजली वितरण कंपनियों को भी नए प्रावधानों के अनुसार उपभोक्ताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी राहत प्रदान की है। संशोधित नियमों के तहत ओवरलोड उपयोग से जुड़े कुछ लंबित सरचार्ज प्रावधानों में बदलाव किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से उद्योगों और व्यापारिक संस्थानों को अधिक लचीलापन मिलेगा। इससे बिजली प्रबंधन बेहतर होगा, कारोबार की लागत कम करने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार बिजली उपयोग करने की सुविधा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी।
