लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास शुरू होने पर प्रदेशवासियों के लिए पाती लिखी है. उन्होंने लिखा कि श्रावण लोकमंगल, श्रम-सम्मान और सामूहिकता का पावन पर्व है. शिव आराधना संयम, सेवा और समरसता का संदेश देती है. उन्होंने प्रदेशवासियों को इस पावन महीने की शुभकामनाएं भी दी.
त्याग, कृतज्ञता और सह-अस्तित्व का पावन संदेश: सीएम योगी आदित्यनाथ ने पाती में लिखा कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव का हलाहल पान सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है. उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा उसी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण के भाव की अभिव्यक्ति है. देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति दिशा के देवता हैं. उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण हमें प्रकृति के साथ सह अस्तित्व का संदेश देते हैं.
नई ऊर्जा का संचार: मुख्यमंत्री ने लिखा है कि, ज्येष्ठ और आषाढ़ माह के ताप के बाद जब श्रावण माह की रिमझिम धरती को स्पर्श करती है तो माटी की सोंधी सुगंध के साथ चारों ओर हरियाली छा जाती है. नदियां अपने पूर्ण सौष्ठव के साथ प्रवाहित होती हैं और मयूर का नृत्य सृष्टि के उल्लास का उद्घोष बन जाता है. यही उमंग गांव से लेकर नगरों तक जीवन में नई ऊर्जा के रूप में झलकती है.
संस्कृति और सामूहिक श्रम का प्रतीक: प्रदेशवासियों के नाम लिखी पाती में सीएम योगी ने कहा है कि, श्रावण में धान रोपाई के बाद सहभोज, साझा संस्कृति और सामूहिक श्रम का जीवंत प्रतीक है. श्रावण प्रकृति संरक्षण और सहअस्तित्व का संदेश देता है. जल संरक्षण जनभागीदारी से ही सफल होगा. पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है. यूपी में करीब 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं. लखनऊ की सोसाइटी ने 50 हजार लीटर जल पुनर्भरण की पहल की है. श्रावण को सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का माह बनाएं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि हर बूंद का सम्मान, हर पौधे का संरक्षण करें. प्रकृति से जितना लें, उतना उसे लौटाने का भी संकल्प लें.
