देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रस्तावित टिहरी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को सचिवालय में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें मेडिकल कॉलेज के निर्माण, भूमि चयन और मास्टर प्लान की रूपरेखा पर विस्तृत समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण ऐसे रणनीतिक स्थान पर किया जाएगा, जिससे टिहरी और उसके आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों की अधिकतम आबादी को इसका सीधा लाभ मिल सके।
परियोजना के मुख्य आकर्षण और लाभ
1. स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी मजबूती
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आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं: मेडिकल कॉलेज को विश्वस्तरीय और आधुनिक सुविधाओं से युक्त मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा।
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दूरस्थ क्षेत्रों में सुधार: पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय निवासियों को इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
2. रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
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इस बड़ी परियोजना के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
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क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास तेजी से होगा।
भूमि चयन प्रक्रिया पूरी, शासन को जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है:
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स्वास्थ्य सचिव के निर्देश: स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे ने जिलाधिकारी टिहरी को निर्देश दिए कि चयनित भूमि का अंतिम प्रस्ताव जल्द से जल्द शासन को भेजा जाए, ताकि आगे की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृतियां तेजी से ली जा सकें।
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चिकित्सा शिक्षा में नया अध्याय: स्वास्थ्य मंत्री ने इस परियोजना को प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ‘नया मील का पत्थर’ करार दिया।
“मेडिकल कॉलेज बनने से न केवल टिहरी बल्कि पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। हर नागरिक तक बेहतर चिकित्सा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।” — सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री (उत्तराखंड)
