पंतनगर। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गांधी हॉल में आयोजित हरित यज्ञ कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने और विश्वविद्यालय के साथ सहयोग के लिए एमओयू करने पर बधाई दी तथा उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने गांधी हॉल में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भी निरीक्षण किया।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़ा महापर्व है। भारतीय सनातन परंपरा में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। पर्यावरण संरक्षण केवल दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ऋषियों की तपोभूमि, मां गंगा और यमुना की उद्गमस्थली तथा समृद्ध जैव विविधता वाला प्रदेश है। यहां प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार है। हरेला पर्व हमें हरियाली, नवजीवन, कृषि समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापवृद्धि, वनाग्नि, हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने और जैव विविधता पर बढ़ते संकट जैसी चुनौतियां पूरी मानवता के सामने हैं। ऐसे में हरेला हमें केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करने और प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने उत्तराखंड की पर्यावरणीय चेतना का उल्लेख करते हुए चिपको आंदोलन, गौरा देवी के योगदान और मैती आंदोलन जैसी प्रेरणादायी पहलों को याद किया। उन्होंने कहा कि बीज बम (सीड बॉल), वन पंचायतों, महिला मंगल दलों, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं की भागीदारी पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दे रही है।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को प्राकृतिक पर्यावरण, वनों, नदियों, झीलों और वन्यजीवों के संरक्षण का दायित्व देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान मातृशक्ति, मातृभूमि और मातृप्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रेरणादायी प्रयास है।
उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने और प्रत्येक परिवार से कम से कम एक पौधा लगाने के साथ उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
राज्यपाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को हरित क्रांति का मार्ग दिखाया था। अब समय आ गया है कि यह संस्थान ‘ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0’ का नेतृत्व करे।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विज्ञान, जल संरक्षण, कार्बन प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की कृषि जलवायु अनुकूल, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि उनका प्रत्येक शोध सीधे किसानों तक पहुंचे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।
राज्यपाल ने उत्तराखंड की 71 प्रतिशत वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा 50 हजार पौधों के रोपण के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना आवश्यक है, उनका संरक्षण उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
इससे पूर्व राज्यपाल ने तराई भवन में रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि हरेला भारतीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने गौरा देवी, अमृता देवी बिश्नोई और चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से कम से कम तीन पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने स्वागत संबोधन में कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश की हरित क्रांति का जन्मस्थान रहा है और आज भी कृषि अनुसंधान, नवाचार तथा किसान हितैषी तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि हरेला महोत्सव के तहत विश्वविद्यालय परिसर, अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों और गोद लिए गए गांवों में 50 हजार पौधों का रोपण और संरक्षण किया जाएगा। यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का आंदोलन बनेगा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पांच प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। इनमें गुरू इंदर मोहन सिंह, एस.के. गौतम, मंजुल प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह और रजत वर्धन शामिल रहे।
इन पूर्व छात्रों ने संपीडित बायोगैस एवं बायो-रिफाइनरी सुविधा, फर्टिगेशन प्रणाली में स्वचालन, कार्बन मैपिंग एवं कार्बन क्रेडिट, रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों के अनुसंधान तथा कृषि उद्यमिता से जुड़ी परियोजनाओं के लिए विश्वविद्यालय के साथ एमओयू करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ड्रैगन फ्रूट की खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अनूप मौर्य को राज्यपाल ने प्रशस्ति पत्र और एक लाख 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि का चेक देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (ऑपरेशन फार्म) डॉ. अमित भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, पंतनगर शाखा की ओर से पौध खरीद के लिए तीन लाख रुपये की सहायता राशि और पौधों की सुरक्षा के लिए 500 ट्री गार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. उत्तम सिंह नेगी, विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
