पंजाब में सतलुज फिल्म का विवाद बढ़ता जा रहा है जिससे सूबे में भाजपा असहज है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि भाजपा पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है, लिहाजा पार्टी इस मुद्दे पर विवाद को खत्म करना चाहती है। इसी के चलते इस मसले को तूल दे रहे केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के तेवर भी अब नरम पड़ गए हैं।
बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर दिलजीत दोसांझ की तस्वीर के साथ एक भावुक वीडियो और संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा- होला आनंदपुर साहिब का है जहां खालसा की सृजना हुई और होली मथुरा की है जहां गोबिंद हैं, इसलिए ये दोनों ही रंग गोबिंद के हैं और मानवता के नाते हम सब एक हैं। दिलजीत की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए गोबिंद के दो रंगों की बात कहकर केंद्रीय मंत्री ने पंजाब में हिंदू-सिख भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
इस पोस्ट के तुरंत बाद बिट्टू ने एक और वीडियो संदेश जारी कर अपनी रणनीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने खुद की तुलना जंगल की आग बुझाने वाले एक छोटे से पक्षी से करते हुए लिखा कि पंजाब और देश के प्रति वे अपनी जिम्मेदारी इसी तरह निभाते रहेंगे। उनका प्रयास सिर्फ जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए अपनी चोंच में पानी की बूंदें डालने जैसा है ताकि इतिहास में उनका नाम आग लगाने वालों में नहीं बल्कि आग बुझाने वालों में गिना जाए। बिट्टू इस फिल्म के बाद से ही निर्माताओं पर खासे आक्रामक दिख रहे थे।
जख्म कुरेदने से किसी का भला नहीं होगा : भाजपा
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि सतलुज फिल्म का विवाद अब खत्म होना चाहिए। इन पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने से किसी का भला नहीं होगा। पंजाब ने बहुत दर्द सहा है और घावों को भरने में समय लगता है। धर्म से परे, पंजाबियों की हत्याओं को कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए। हमें अपने खोए लोगों को याद कर उनका सम्मान करना चाहिए न कि शोर-शराबे के लिए उनका फायदा उठाया जाए। पंजाब की शांति सबसे पहले है।
हिंदू-सिख का मुद्दा नहीं है : आप
आप के कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक्क और डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह सत्य घटनाओं पर आधारित एक फिल्म है। इसमें हिंदू और सिख की बात कहां से आ गई। उस दौर में विभिन्न मजहबों के लोग आतंकवाद की भेंट चढ़े थे। उस घटनाक्रम पर यह फिल्म बनी है लेकिन भाजपा के नेता इसे हिंदू और सिखों का रंग देने में लगे हैं जो गलत है।
हरिके पत्तन में बनेगा शहीदी स्मारक
इसी विवाद के चलते श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को आदेश दिया कि सभी बेकसूरों की याद में हरिके पत्तन में शहीदी पत्तन के नाम पर स्मारक बनाया जाए। गड़गज्ज ने कहा कि उस दौर में जो मारे गए, उनमें सिर्फ सिख ही नहीं बल्कि दूसरे मजहब के लोग भी शामिल थे। लिहाजा यह शहीद स्मारक सभी की याद में बनेगा। गड़गज्ज मंगलवार को इस फिल्म के मुख्य पात्र पंजाब में ह्यूमन राइट्स संगठन के नेता जसवंत सिंह खालड़ा की याद में हरिके पत्तन में अरदास समागम में भाग लेने गए थे, जहां उन्होंने उक्त घोषणा की।
