लखनऊ। जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल शनिवार 11 जुलाई को समाप्त होगा। कार्यकाल समाप्त होते ही जिला पंचायत अध्यक्षओँ को ही प्रशासक बना दिए जाने की संभावना अधिक है। सरकार की मंशा भी यही है। इन्हें प्रशासक बनाए जाने की फाइल पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया है। शनिवार तक इस पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।
दूसरी तरफ हाई कोर्ट इलाहाबाद द्वारा ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने पर संवैधानिक प्रश्न उठाए जाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने पर संशय की स्थिति बताई जा रही है। सरकार इस मुद्दे पर मंथन में जुटी है।
इस मामले में प्रदेश सरकार निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के अपने निर्णय पर अडिग रहती है तो जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बना दिए जाना तय माना जा रहा है। यदि सरकार ने हाई कोर्ट मेंं जवाब दाखिल करने और उसके निर्णय का इंतजार करने का निर्णय लिया तो पहले की तरह जिलाधिकारियों को प्रशासक बनाने का निर्णय ले सकती है।
प्रशासक बनाने का बढ़ाया था प्रस्ताव
निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बना दिए जाने के कुछ दिनों बाद ही पंचायती राज विभाग ने कार्यकाल समाप्त होने पर मौजूदा ब्लाक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाने का प्रस्ताव बढ़ाया था। विभागीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति देने के लिए फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा है। मंत्री ने कार्यकाल समाप्त होने पर ब्लाक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजे जाने की पुष्टि की है।
जिला पंचायत अध्यक्ष संघ के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी का कहना है कि ग्राम प्रधानोंं की तरह ही कार्यकाल समाप्त होने पर जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने की मांग मुख्यमंत्री से की जा चुकी है।
विश्वास व्यक्त किया है कि पंचायती राज अधिनियम की जिस व्यवस्था के तहत कार्यकाल समाप्त होने पर निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक बनाए गए हैं, वैसे ही जिला पंचायतों के अध्यक्ष भी प्रशासक बनाए जाएंगे। ब्लाक प्रमुख संघ के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह सेनानी तो पूरी तरह आश्वस्त हैं कि सरकार कार्यकाल समाप्त होने पर जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों को ही प्रशासक बनाएगी।
