शिमला। राज्य सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित टैबलेट-लैपटॉप योजना में बड़ा बदलाव किया है। मेधावी विद्यार्थियों को अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कूपन या ई-वाउचर देने के बजाय उनके बैंक खातों में सीधे 16 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।
डीबीटी के माध्यम से यह पैसा सीधा मेधावियों के खाते में डाला जाएगा। सचिव शिक्षा राकेश कंवर की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। हाल ही में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विभागीय बैठक में इसके निर्देश दिए थे।
दसवीं-बारहवीं कक्षा और कॉलेज स्तर के 9500 मेधावी विद्यार्थियों को सरकार की ओर से डिजिटल उपकरण उपलब्ध करवाने की घोषणा की है। इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन के माध्यम से इसकी खरीद की जानी थी। विभाग ने उपकरण देने चार कंपनियों को इंपैनल किया था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने अब पुरानी दरों पर उपकरण देने में असमर्थता जताई थी।
मार्च में दिए थे ई वाउचर
शिक्षा विभाग ने मार्च महीने में मेधावी विद्यार्थियों के लिए 16 हजार रुपये के ई-वाउचर जारी किए थे। 9500 में से एक हजार विद्यार्थियों को उपकरण मिल पाए हैं। 8500 को अभी उपकरण मिलना बाकी है। अब इन्हें खाते में पैसा मिलेगा। पिछले तीन सालों के ये मेधावी है।
राज्य सरकार ने तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर मंडी में कुछ मेधावियों को लैपटाप देकर इसकी शुरूआत भी की थी। विद्यार्थियों ने उपकरणों की बुकिंग भी करवा दी थी। विद्यार्थियों को जारी रिडीम कार्ड निष्क्रिय होने की शिकायतें विभाग तक पहुंची। विभाग ने सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है।
यह आई थी दिक्कत
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लैपटॉप और टैबलेट के दाम बढ़ गए हैं। इसलिए चयनित कंपनियों ने महंगे उपकरणों और बढ़ी हुई रैम-स्टोरेज लागत का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।
