शिमला। प्रदेश सरकार ने राज्य में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब सरिया (स्टील) और इथेनाल से जुड़े नए उद्योगों की स्थापना को मंजूरी नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि ये उद्योग राज्य को राहत देने के बजाय स्थानीय जनता और संसाधनों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर रहे हैं।
यही वजह है कि सरकार ने न केवल नए प्लांट लगाने पर रोक लगाई है, बल्कि पहले से स्थापित ऐसी इकाइयों के विस्तार (एक्सपेंशन यूनिट) के प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है।
हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सिंगल विंडो क्लीयरेंस कमेटी की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। उद्योग विभाग के माध्यम से कई कंपनियों ने अपने यूनिट्स के विस्तार की मंजूरी मांगी थी, जिसे सरकार ने साफ तौर पर नामंजूर कर दिया था।
इसके पीछे मुख्य कारण इन उद्योगों में होने वाली पानी और बिजली की बेतहाशा खपत होती है। एक-एक सरिया इकाई लगभग 25-25 मेगावाट बिजली की मांग करती है। बिजली बोर्ड के लिए इतनी भारी मात्रा में बिजली की निर्बाध आपूर्ति करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इथेनाल उद्योग के इन प्रोजेक्ट्स में पानी की भारी जरूरत होती है।
सिंगल विंडो बैठक में लिया गया था निर्णय
सिंगल विंडो बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों की ओर से अवगत करवाया गया कि इन दोनों तरह के उद्योगों से नुकसान अधिक होता है और राज्य के युवाओं को रोजगार मिलता है और न ही कर के रूप में अधिक लाभ।
सरकार अब ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है जो राज्य के अनुकूल हों। भविष्य में केवल उन्हीं निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कम संसाधनों में अधिक निवेश लाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा कर सकें। -हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री।
