हरियाणा के हांसी क्षेत्र के चानौत गांव में पानी को लेकर चल रहा विवाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। पिछले करीब 40 दिनों से लगातार धरना दे रहे ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने के लिए चंडीगढ़ स्थित संत कबीर कुटीर आवास का रुख किया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान निकल सकता है।
जानकारी के अनुसार धरना कमेटी के 35 सदस्य गुरुवार सुबह करीब 9 बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे और सरकार से स्थायी समाधान की अपेक्षा करेंगे।
धरना कमेटी के सदस्य अनूप सिंह चानौत ने बताया कि मुख्यमंत्री के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी जाएंगी। पहली मांग भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन परियोजना में टी-कनेक्शन लगाकर चानौत गांव के जलघर तक पानी पहुंचाने की है। दूसरी मांग धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए मुकदमों को रद्द करने की है। उनका कहना है कि गांव के लोग केवल अपने हिस्से के पेयजल की मांग कर रहे हैं और इसके लिए लंबे समय से शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार मुख्यमंत्री से मुलाकात का कार्यक्रम जिला प्रशासन के माध्यम से तय हुआ। धरना कमेटी का कहना है कि बुधवार शाम करीब सात बजे उपायुक्त राहुल नरवाल ने पूर्व सरपंच सत्यवान और विशाखा चौधरी को फोन कर मुख्यमंत्री से मुलाकात की सूचना दी थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने तुरंत तैयारी शुरू की और गुरुवार सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गया।
दरअसल पूरा विवाद भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन परियोजना को लेकर है। सरकार द्वारा लगभग 61.44 करोड़ रुपये की लागत से हांसी शहर को बेहतर पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए एक बड़ी पाइपलाइन परियोजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत हांसी के जलघरों से लेकर बरवाला रोड स्थित बरवाला ब्रांच तक 36 इंच व्यास की पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इस नहर में भाखड़ा का पानी आता है, इसलिए इसे भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन परियोजना नाम दिया गया है।
यह पाइपलाइन चानौत गांव से होकर गुजर रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि गांव को इस परियोजना का कोई सीधा लाभ नहीं मिल रहा। उनकी मांग है कि पाइपलाइन में टी-कनेक्शन लगाकर गांव के जलघर को भी इससे जोड़ा जाए ताकि चानौत के लोगों को पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध हो सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पाइपलाइन उनके गांव से होकर गुजर रही है तो गांव को पेयजल सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं है। इसी मांग को लेकर गांव के लोग पिछले 40 दिनों से धरना दे रहे हैं। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण लगातार भाग ले रहे हैं और सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं।
अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और धरना कमेटी के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो लंबे समय से जारी यह विवाद समाप्त हो सकता है। वहीं यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो ग्रामीणों द्वारा आंदोलन को और तेज करने की संभावना भी जताई जा रही है।
