देहरादून। मसूरी रोड स्थित पुरकुल क्षेत्र की करोड़ों रुपये की भूमि से जुड़े विवाद में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता युवा उद्यमी बिक्रम राणा का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों और प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
मामला उत्तराखंड के युवा उद्यमी बिक्रम राणा से जुड़ा है, जिन्होंने पुलिस प्रशासन की कथित निष्क्रियता से निराश होकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पोर्टल के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मसूरी रोड स्थित पुरकुल गांव की एक भूमि के विक्रय को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूमि सौदे के तहत करीब 19 करोड़ 81 लाख रुपये का भुगतान किए जाने के बावजूद उनके पक्ष में भूमि का बैनामा नहीं कराया गया।
इस मामले में राजपुर थाना, देहरादून में 14 सितंबर 2025 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कई व्यक्तियों को नामजद करते हुए धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए हैं।
प्रकरण में नामजद पक्षों ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अग्रिम जमानत प्राप्त की थी। इसके बाद प्राथमिकी को निरस्त कराने के उद्देश्य से नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
जानकारी के अनुसार नैनीताल हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि पुलिस को जांच और आगे की कार्रवाई तेज करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
बिक्रम राणा का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि इस कारण उन्हें उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग करनी पड़ रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर विश्वास प्रभावित हो सकता है।
मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं जारी हैं। शिकायतकर्ता पक्ष निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग कर रहा है, जबकि आरोपित पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से इस संबंध में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में न्यायालय के आदेशों के अनुरूप जांच एजेंसियों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक होता है, ताकि सभी पक्षों को न्याय मिल सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आ सकें।
पुरकुल भूमि विवाद का यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
