धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वीरवार को जिला कांगड़ा के धर्मशाला में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम में जिलेभर से आए 845 प्रधानों और 846 उपप्रधानों ने पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों के निर्वहन का सामूहिक रूप से संकल्प लिया। इस मौके पर पंचायत प्रतिनिधियों में अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।
पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ेगा, नहीं होगी बजट की कमी
इस खास अवसर पर नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए दो बड़े ऐलान किए। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश की पंचायतों में विकास कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके साथ ही, सीएम ने पंचायत प्रतिनिधियों (प्रधान व उपप्रधान) के मानदेय में भी बढ़ौतरी करने का ऐलान किया, जिससे पंडाल में बैठे जनप्रतिनिधियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि वे राजनीति और गुटबाजी से ऊपर उठकर, पूरी ईमानदारी व समर्पण के साथ अपने गांवों की सूरत बदलने के लिए जुट जाएं।
महज 2 मिनट में 1700 लोगों ने ली शपथ
धर्मशाला में हुआ यह शपथ ग्रहण समारोह अनुशासन की एक बेहतरीन मिसाल बना। सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधि निर्धारित समय से पहले ही अपनी सीटों पर आ गए थे। मुख्यमंत्री सुक्खू के बाद सभी 845 प्रधानों ने एक साथ खड़े होकर शपथ ली और इसके ठीक एक मिनट बाद 846 उपप्रधानों ने ईश्वर को साक्षी मानकर शपथ उठाई। मात्र 2 मिनट के भीतर करीब 1700 प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण संपन्न हो गया।
18 ब्लॉकों के लिए बनाए थे अलग रजिस्ट्रेशन काऊंटर
इतने बड़े स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न करवाने के लिए जिला प्रशासन ने अचूक इंतजाम किए थे। जिले के सभी 18 ब्लॉकों से आए प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए अलग-अलग पंजीकरण काउंटर बनाए गए थे। पंडाल में अव्यवस्था से बचने के लिए खंड स्तर पर बैठने की विशेष व्यवस्था थी, जिससे किसी को भी हाजिरी के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ा। हजारों की भीड़ होने के बावजूद पूरी व्यवस्था इतनी सटीक थी कि कहीं कोई अफरा-तफरी नहीं हुई।
विकास कार्यों को गति देने के लिए 27 जून को होगी पहली बैठक
जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक समारोह को गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न करवाने के लिए पंडाल में कुल 3500 कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। प्रशासनिक मुस्तैदी और बेहतर समन्वय के कारण यह कार्यक्रम पूरी तरह से अनुशासित और सफल रहा। अब ग्रामीण विकास कार्यों को धरातल पर उतारने और गति देने के लिए आगामी 27 जून को जिला परिषद, पंचायत प्रतिनिधियों व समिति सदस्यों की पहली महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
