चंडीगढ़: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख समाज से किया गया महत्वपूर्ण वादा पूरा करते हुए राज्य के विद्यालयों की कक्षा 8वीं के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं तथा बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन, संघर्ष और बलिदान को शामिल कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के लाखों विद्यार्थी सिख इतिहास के गौरवशाली अध्यायों से रू-ब-रू हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के दौरान उन्होंने सिख इतिहास को विद्यालयी शिक्षा का हिस्सा बनाने की घोषणा की थी, जिसे अब लागू कर दिया गया है। श्री गुरु नानक देव जी से लेकर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी सिख गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा, करुणा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया जो आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। बाबा बंदा सिंह
बहादुर का जीवन साहस, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कर कमजोर वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके जीवन से युवाओं को सत्य, न्याय और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी। नए अध्याय विद्यार्थियों में देशभक्ति, सेवा भाव, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करेंगे। सरकार शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं बल्कि संस्कार निर्माण का सशक्त साधन मानती है।
सिख समाज ने जताया आभार
मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी. डॉ. प्रभलीन सिंह ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने सिख समुदाय की लंबे समय से जुड़ी भावनात्मक मांग को पूरा कर समाज की भावनाओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश सरकार की समावेशी सोच और सभी वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
