शिमला: सरकारी सेवा के दौरान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को अब पूरा वेतन मिलेगा। इससे पहले अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को 40 फीसदी और महंगाई भत्ते के साथ आवास भत्ते का लाभ दिया जाता था। इतना ही नहीं, पहले अवकाश का लाभ लेने वाले कर्मचारियों को भी शेष वेतन मिलेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की इस बजट घोषणा पर मंत्रिमंडल की पिछली बैठक में मोहर लगी थी।
राज्य सरकार ने इसके लिए सीसीएस (अवकाश) नियम, 1972 के नियम 56 में संशोधन किया है, जिसके अंतर्गत अध्ययन अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान 100 फीसदी वेतन मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा और उन्नत व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने से न केवल कर्मचारियों का व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और प्रभावशीलता भी बढ़ती है।
सरकारी कर्मचारियों को देना होगा शपथ पत्र
सरकारी कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए एक शपथ-पत्र देना होगा। इसमें उनको यह स्पष्ट करना होगा कि अध्ययन अवधि के दौरान वह किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपैंड या अंशकालिक रोजगार से कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहे हैं।
डाक्टरों के अध्ययन अवकाश की पहले हो चुकी है बहाली
राज्य सरकार इससे पहले भी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में उच्च एवं विशेषज्ञता पाठ्यक्रम करने वाले एलोपैथिक डाक्टरों के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन बहाल कर चुकी है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सत्ता में आने के तुरंत बाद 1.36 लाख एन.पी.एस. कर्मचारियों के लिए पुरानी पैंशन योजना के दायरे में लाने का निर्णय लिया था। अब सरकार ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने को भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
