शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंत्रियों और विधायकों, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, उपायुक्तों के वेतन में स्थगन अस्थायी कटौती (डिफरमेंट) समाप्त करने घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वेतन स्थगन संबंधी अधिसूचना केवल उन पर लागू रहेगी और अन्यों के लिए इस अधिसूचना को वापस लिया जाए।
बकाया अगले वेतन के साथ मिलेगा
उन्होंने कहा कि स्थगित वेतन का बकाया अगले महीने पूर्ण वेतन के साथ जारी किया जाएगा। प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति ठीक होते ही हमने वेतन की अस्थायी कटौती को वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अगले महीने जुलाई में मुझे छोड़कर मंत्रियों, विधायकों व हर स्तर के अधिकारियों को एक साथ कटौती धनराशि का वेतन दे दिया जाएगा।
6 महीने तक वेतन कटौती का लिया था फैसला
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था मुझ पर लागू नहीं होगी। सरकार ने वेतन स्थगन की निर्धारित प्रतिशत धनराशि को छह माह तक जारी रखने का निर्णय लिया था। लेकिन तीसरे महीने ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्णय वापस ले लिया।
सिर्फ दो महीने हुई कटौती
सरकार ने अप्रैल से मुख्यमंत्री के वेतन में 50 प्रतिशत, विधानसभा अध्यक्ष व मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत, विधायकों के वेतन से 20 प्रतिशत वेतन स्थगन कटौती करने का निर्णय लिया था। मुख्य सचिव से लेकर सचिव तक के अधिकारियों के वेतन से 30 प्रतिशत, उससे नीचे 20 प्रतिशत और शेष श्रेणियों के वेतन से 10 प्रतिशत कटौती की गई थी। प्रदेश सरकार ने छह महीने तक वेतन को अस्थायी तौर पर स्थगन करने का निर्णय लिया था।
विधायकों के वेतन से एक माह हुई कटौती
विधानसभा सचिवालय प्रशासन विधायकों के वेतन से 20 प्रतशित स्थगन को मई माह में ही कर पाया। अप्रैल माह में किसी भी विधायक ने वेतन स्थगन करने के संबंध में लिखित तौर पर दिया था। अब जुलाई में प्रत्येक विधायक को 20 प्रतिशत कटौती धनराशि भी साथ मिलेगी।
