पटना : बिहार में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश इकाई की गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सबसे अधिक तवज्जो युवाओं को दी है. संजय सरावगी की टीम में 60% युवा चेहरे शामिल किए गए हैं. ज्यादातर पुराने चेहरे प्रदेश कमेटी से बाहर हो गए हैं. सवाल यह उठता है कि उनका क्या होगा जो प्रदेश में कई कमिटी में ताकतवर भूमिका में थे?
60% युवाओं को प्रदेश कमेटी में मिली जगह : बिहार में अगले तीन-चार साल तक कोई चुनाव नहीं है. इसलिए अभी से भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुट गई है. प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने 37 पदाधिकारी की टीम का ऐलान किया है, जिसमें की 22 युवा चेहरे हैं. इस हिसाब से लगभग 60% युवाओं को संजय सरावगी ने अपनी टीम में जगह दी है.
‘प्रयोग के तहत सबकुछ हो रहा’ : वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कौशलेंद्र प्रियदर्शी कहते हैं कि आने वाले कुछ सालों तक बिहार में चुनाव नहीं होना है. इस वजह से भाजपा संगठन को धार देना चाहती है. भारतीय जनता पार्टी इन दिनों प्रयोग धर्मी भी दिख रही है. पार्टी के स्तर पर कई तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं.
”प्रयोग का ही नतीजा है कि सबसे अधिक युवाओं को इस बार संगठन में रखा गया है. साफ है कि पार्टी भविष्य की सियासत को ध्यान में रखते हुए युवाओं को आगे कर रही है. जिसकी बदौलत बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को सच करना चाहेगी.”– कौशलेंद्र प्रियदर्शी, राजनीतिक विश्लेषक
बिहार में 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की : यहां यह बताना भी जरूरी है कि बिहार युवा आबादी वाला राज्य है. राजनीतिक दल भी इस बात को शिद्दत से समझते हैं. आंकड़ों की अगर बात करें तो बिहार की लगभग 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है, जो इसे देश का सबसे युवा राज्य बनाती है. हालिया आंकड़ों और अनुमानों के अनुसार, राज्य में 15 से 59 वर्ष के कार्यशील आयु वर्ग (Working Age Group) की संख्या लगभग 7.23 करोड़ है.
”युवाओं पर प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भरोसा जताया है और तमाम युवा उनके भरोसे पर खड़े उतरेंगे. नई टीम से पार्टी के अंदर उर्जा का संचार हुआ है. प्रदेश अध्यक्ष ने बेहद संतुलित टीम की घोषणा की है. हर क्षेत्र के आधार पर भी बैलेंस किया गया है. जहां तक पुराने नेताओं का सवाल है तो कोई भी नेता गुमनाम नहीं होते हैं सिर्फ उनकी भूमिका बदल जाती है.”- पंकज सिंह, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
अनिश्चितता के भंवर में BJP के कई नेता : बिहार बीजेपी में संगठन के काम को करने की कला कम लोगों में है. पार्टी में कई ऐसे नेता थे जो संगठन की सूझबूझ रखते थे. उसी बिनाह पर उन्हें लगातार संगठन में उपाध्यक्ष या महामंत्री बनाया जा रहा था. इस बार संजय सरावगी ने वैसे नेताओं पर कम भरोसा जताया है. फेहरिस्त में सुशील चौधरी, राधा मोहन शर्मा, शिवनारायण महतो, जनक राम, देवेश कुमार, राजेंद्र सिंह और सिद्धार्थ शंभू सरीखे नेताओं का नाम शामिल है.
सुशील चौधरी को है इंतजार : सुशील चौधरी को नित्यानंद राय की टीम में जगह मिली थी और वह उपाध्यक्ष बनाए गए थे. बाद में संजय जायसवाल की टीम में सुशील चौधरी प्रदेश महामंत्री बनाए गए थे. सुशील चौधरी संगठन के कार्य में कुशल माने जाते थे. पिछले दो कमेटी में सुशील चौधरी को जगह नहीं मिली है और फिलहाल वह गुमनाम दिख रहे हैं.
राजेंद्र सिंह को संगठन में नहीं मिली जगह : बिहार बीजेपी में राजेंद्र सिंह की पहचान मजबूत संगठनकर्ता के रूप में है. राजेंद्र सिंह झारखंड के संगठन महामंत्री थे और संगठन से वह भाजपा में आए हैं. राजेंद्र सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चिराग पासवान की पार्टी से दिनारा से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं. कुछ महीनों के बाद राजेंद्र सिंह की दल में फिर से वापसी हुई और उपाध्यक्ष बनाए गए. राजेंद्र सिंह दो बार उपाध्यक्ष और एक बार महामंत्री रह चुके हैं.
दो बार महामंत्री रह चुके हैं राधा मोहन शर्मा : जहानाबाद जिले से आने वाले राधा मोहन शर्मा भी मजबूत संगठनकर्ता माने जाते हैं. उन्हें पार्टी के अंदर कमिटेड कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है. राधा मोहन शर्मा को नित्यानंद राय ने अपनी टीम में प्रदेश महामंत्री के रूप में जगह दिया था. उसके बाद राधा मोहन शर्मा संजय जायसवाल की टीम में भी उपाध्यक्ष के तौर पर रहे. दिलीप जायसवाल की टीम में भी राधा मोहन शर्मा महामंत्री थे. हालांकि संजय सरावगी की टीम में राधा मोहन शर्मा को महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिली. राधा मोहन शर्मा विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं. 2 साल के कार्यकाल के लिए उन्हें विधान परिषद भेजा गया था.
शिवनारायण महतो को नहीं मिली जगह : शिवनारायण महतो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भाजपा में आए थे. नित्यानंद राय ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्हें उपाध्यक्ष बनाया था. शिवनारायण महतो दो बार पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं. वर्तमान टीम में शिवनारायण महतो को जगह नहीं मिली है. हालांकि वह अभी भी संगठन के लिए काम कर रहे हैं.
भूमिका तलाश रहे हैं सिद्धार्थ शंभू : युवा नेता सिद्धार्थ शंभू की पहचान भाजपा में मजबूत संगठनकर्ता के रूप में है. संजय जायसवाल ने अपनी टीम में सिद्धार्थ शंभू को पहले तो प्रदेश मंत्री बनाया था बाद में उपाध्यक्ष बनाया. सम्राट चौधरी ने भी अपनी टीम में सिद्धार्थ शंभू को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था. सिद्धार्थ शंभू को वर्तमान टीम में जगह नहीं मिली और वह अपने लिए भूमिका की तलाश कर रहे हैं.
जनक राम को भी थी उम्मीद : जनक राम भारतीय जनता पार्टी का दलित चेहरा हैं और वह सांसद रह चुके हैं. बिहार सरकार में जनक राम दो बार मंत्री भी रहे हैं. जनक राम को संगठन की जिम्मेदारी भी दी गई थी. जनक राम वर्तमान में विधान पार्षद हैं. साल 2021 में जनक राम को भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश महामंत्री बनाया था.
38 में से 17 सवर्ण जाति के नेताओं को मिली जगह : प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कमेटी में कुल 38 नेताओं को जगह दी है. जिसमें 17 नेता सवर्ण हैं. जातिगत आधार पर अगर बात कर ले तो पिछड़े समुदाय से 11, अति पिछड़े से 8, भूमिहार जाति से 6, राजपूत जाति से 6, ब्राह्मण जाति से चार, दलित से 2 और कायस्थ जाति से एक नेता को संगठन में जगह मिली है. संजय सरावगी की टीम में कुल मिलाकर 22 नए लोगों को जगह मिली है.
विधायक निशा सिंह महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी : खास बात यह है कि इस बार तीन विधायकों को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. पूर्व राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह के पुत्र और विधायक त्रिविक्रम सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा विधायक सुजीत पासवान को भी अनुसूचित जाति मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है. निशा सिंह को महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है.
‘नया जोश, युवा चेहरा और नया खून आया’ : पार्टी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा है कि इससे बेहतर टीम हो ही नहीं सकती है. संगठन में नया जोश, युवा चेहरा और नया खून आया है. पार्टी के अंदर उर्जा का संचार हुआ है. प्रदेश अध्यक्ष के फैसले से हम लोग बेहद खुश हैं.
”संगठन में नए चेहरे दिख रहे हैं लेकिन यह सभी पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे हैं. बाकी के कार्यकर्ताओं के लिए भी यह बड़ा संदेश है, अगर आप ईमानदारी से काम करेंगे तो पार्टी आपको महत्व देगी. पुराने कार्यकर्ताओं का भी पार्टी में उतना ही सम्मान है. पार्टी अनुभव और युवा जोश दोनों से चलती है.”– कुंतल कृष्ण, प्रवक्ता, BJP
