चंडीगढ़। हरियाणा में मेरा पानी, मेरी विरासत योजना का लाभ अब सभी जिलों के किसान उठा सकेंगे। धान को छोड़कर पानी की कम लागत वाली वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का, कपास, अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, तिल, अरंडी, मूंगफली, चारा फसलें, प्याज, सब्जियां, पापुलर और सफेदा लगाने वाले किसानों को 8000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जिन किसानों ने धान न लगा कर खेत खाली छोड़ा है वे भी योजना के अंतर्गत लाभान्वित होंगे।
इसके अलावा दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2000 रुपये बोनस स्वरूप दिए जाएंगे। योजना के तहत पंजीकरण 20 मई से शुरू हो गया है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले किसान ही योजना के पात्र होंगे।
15 जून तक रजिस्ट्रेशन करा सकते
वहीं, धान की सीधी बिजाई योजना को महेंद्रगढ़ को छोड़कर सभी जिलों में लागू कर दिया गया है। धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को भौतिक सत्यापन के बाद 4500 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। योजना का लाभ उठाने के लिए किसान मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 15 जून तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
वहीं, प्रदेश सरकार ने 15 जून तक धान की पारंपरिक रोपाई पर पूर्णतः रोक लगा दी है। यदि कोई किसान निर्धारित तिथि से पहले रोपाई करता पाया गया, तो विभाग उसकी फसल नष्ट करने के साथ-साथ जुर्माना भी वसूल सकता है। हालांकि किसान इस अवधि में धान की सीधी बिजाई कर सकते हैं। 15 जून के बाद मानसून के दस्तक देने से भूजल पर सिंचाई का दबाव कम हो जाता है, जिससे जल संरक्षण में मदद मिलती है।
