कानपुर के घाटमपुर के रेउना गांव के बाद अब सचेंडी में ‘जामताड़ा’ की तरह ठगी करने वाले गिरोह के आठ लोगों को गुरुवार को पकड़ा गया है। खेत-खंडहर या ट्यूबवेल के पास बैठकर लोगों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने के नाम पर सीबीआई का भय दिखाते थे। खुद को सीबीआई का अफसर बताकर मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर रुपये ट्रांसफर करा लेते थे। यूपी समेत चार राज्यों की 22 शिकायतें पहुंचने के बाद क्राइम ब्रांच और सचेंडी पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) की मदद से इन्हें दबोचा है। इनका सरगना आठवीं पास है, जबकि बाकी आरोपी 10वीं या 12वीं पास हैं। पुलिस को आशंका है कि करीब पांच साल से सक्रिय गिरोह में आसपास के और भी लोग शामिल हैं। अभी तक करीब दो करोड़ की ठगी की बात सामने आ रही है।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि एनसीआरपी पोर्टल पर कुछ मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट के खिलाफ मिल रहीं शिकायतों और प्रतिबिंब पोर्टल पर बन रहे हॉटस्पॉट के आधार पर साइबर क्राइम और सचेंडी पुलिस की संयुक्त टीम ने अलग-अलग गांवों से इन्हें गिरफ्तार किया है। इनके पास से पांच मोबाइल, दो चेकबुक, दो पासबुक और दो डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं। गैंग सरगना आठवीं पास रामजी उर्फ आर्यन है। आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वह सीबीआई और पुलिस के अधिकारी बनकर लोगों को कॉल करते थे। लोगों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने की बात कहकर झांसे में लेते थे।
इनकी हुई गिरफ्तारी
सचेंडी के ग्राम छत्तापुरवा निवासी गोरेलाल उर्फ सूरज, रामजी उर्फ आर्यन, गज्जापुरवा निवासी सर्वेश सिंह, रामप्रकाश, रिंकू, ग्राम रेवरी निवासी अवधेश सिंह, ग्राम भैलामऊ निवासी अभिषेक सविता और कानपुर देहात के कैलाशपुर पुलंदर का अभिषेक सिंह।
हिंदी बोलने वाले राज्यों के लोगों को बनाते शिकार
डीसीपी ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल में 22 शिकायतें दर्ज हैं। आरोपितों ने उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में रहने वाले लोगों के साथ ठगी की है। हिंदी भाषा बोलने और समझने वाले राज्यों के लोगों को ही कॉल कर ठगी करते थे। करीब दो करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं।
खेतों और खंडहर में बना रखा है ऑफिस
डीसीपी ने बताया कि सचेंडी के ग्राम छत्तापुरवा, गज्जापुरवा, रेवरी, भीमसेन, भैलामऊ समेत कानपुर देहात के कैलाशपुर समेत आसपास के कई गांव के युवक साइबर ठगी से जुड़े हैं। ये लोग साइबर ठगी के लिए मशहूर ‘जामताड़ा’ की तरह खेतों, ट्यूबवेल, खंडहर में बैठकर लोगों को कॉलिंग कर साइबर ठगी करते थे। डीसीपी ने बताया कि आरोपित इतने शातिर हैं कि वह पीड़ितों से ठगी करने के बाद उनके फोन फॉरमेट करवा देते थे। पीड़ित से कहते थे कि वह किसी से यह बात साझा न करें। ऐसे में आपकी ही बदनामी होगी। वह पुलिस से बचने के लिए सभी साक्ष्य डिलीट करवा देत
सरगना फोन मिलाता, साथी बजाते पुलिस का हूटर
डीसीपी ने बताया कि आरोपित जब किसी को कॉल करते थे। उस वक्त गैंग का एक सदस्य मोबाइल पर पुलिस के हूटर के आवाज वाली वीडियो चलाता था। ताकि यह लगे कि वह सच में पुलिस वाले हैं। जब कोई मुकदमा लिखने की बात पर भी नहीं घबराता, तो उसे पिटाई का वीडियो भेजकर डराते थे। गैंग का सरगना रामजी उर्फ आर्यन और गोरेलाल लोगों को धमकाने के लिए कॉल करते थे। सर्वेश, अभिषेक और रिंकू उनका सहयोग करते थे। अवधेश, अभिषेक सविता और राम प्रकाश ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालने का काम करते थे।
