शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का भुगतान अब किसी भी सूरत में लटकना नहीं चाहिए। सरकार ने केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि उसकी निगरानी के लिए भी सख्त व्यवस्था की है।
निर्देश के अनुसार सात दिन में भुगतान सुनिश्चित करने के बाद 10 दिन के भीतर अनुपालना रिपोर्ट वित्त विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।
सीएम ने 15 अप्रैल को की थी घोषणा
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में 15 अप्रैल को रिकांगपिओ से घोषणा की थी, जिसके बाद आदेश भी जारी हुए थे। बावजूद इसके कई विभागों में भुगतान में देरी सामने आई, जिस पर सरकार ने नाराजगी जताई है। सरकार ने खासतौर पर वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लंबित मामलों को प्राथमिकता देने को कहा है।
हजारों पेंशनरों को मिलेगी राहत
माना जा रहा है कि इस फैसले से हजारों पेंशनरों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से अपने हक के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कर्मचारियों के वैधानिक भुगतान में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जा सकती है।
वित्त विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
वित्त विभाग के विशेष सचिव की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि 27 जनवरी, 2026 और 25 अप्रैल, 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापनों के बावजूद कई कार्यालयों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समयबद्ध भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए अब सभी प्रशासनिक विभागों को सख्त हिदायत दी गई है।
डीडीओ और विभागाध्यक्षों को भी निर्देश
सभी विभागों से कहा गया है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों, कार्यालयाध्यक्षों और आहरण एवं वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को तत्काल निर्देश जारी करें, ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई ढिलाई न रहे।
