शिमला। हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच सरकार की तरफ से निविदाएं लगाने को मांगी अनुमति पर राज्य निर्वाचन आयोग ने रोक लगा दी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि जब तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है तब तक किसी भी प्रकार की निविदाओं के लिए आवेदन न भेजे जाएं। नए विकास कार्यों को करना और टेंडर लगाना सीधे तौर पर आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।
करोड़ों के टेंडर को मंजूरी से इन्कार
राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), जल शक्ति विभाग और अन्य विभागों द्वारा प्रस्तावित करोड़ों रुपये के टेंडरों को मंजूरी देने से साफ इन्कार कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जब तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है, तब तक किसी भी नई निविदा प्रक्रिया को अनुमति नहीं दी जाएगी।
आयोग ने विभागों को यह भी साफ कह दिया है कि इस अवधि में टेंडरों से जुड़े किसी भी प्रकार के प्रस्ताव या आवेदन भेजने की जरूरत नहीं है।
कई विभागों ने मांगी थी अनुमति
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में कई विभागों ने बड़े स्तर पर सड़कों, पेयजल योजनाओं और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करने की अनुमति मांगी थी। इन परियोजनाओं की कुल लागत करोड़ों रुपये में आंकी गई थी।
इस तरह के फैसले प्रभावित कर सकते हैं निष्पक्षता
निर्वाचन आयोग ने इन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चुनाव के दौरान इस तरह के फैसले निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। आयोग का मानना है कि अगर चुनाव के दौरान नई परियोजनाएं शुरू होती हैं या ठेके जारी किए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सकता है, जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। प्रदेश में 31 मई तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल शक्ति विभाग और अन्य विभागों ने टेंडर लगाने की अनुमति मांगी थी, उन्हें लौटा दिया है। ये सीधे तौर पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के दायरे में आता है।
-अनिल खाची, आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, हिमाचल प्रदेश।
