लखनऊ : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की ताकत को पूरा जोर लगाकर उतारा. खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाएं और रोड शो पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी. योगी की आक्रामक शैली, विकास मॉडल और कानून व्यवस्था की बातों ने बंगाल की जनता में नई उम्मीद जगा दी. टीएमसी शासन के 15 सालों की ‘अपीलमेंट पॉलिसी’ और गुंडागर्दी के खिलाफ योगी का सीधा हमला भाजपा की रणनीति का मुख्य हथियार बना.
सीएम योगी की रही डिमांड : सीएम योगी ने बंगाल में कई जनसभाएं और रोड शो किए. योगी आदित्यनाथ को शुरू में 8 से 10 रैलियों की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उनकी डिमांड इतनी बढ़ गई कि उन्होंने उससे ज्यादा कार्यक्रम किए. कोलकाता, नंदकुमार, कांथी, आसनसोल, बीरभूम, बोलपुर, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, बांकुरा, कल्याणी, दमदम और कई अन्य जगहों पर उनकी सभाएं हुईं. एक दिन में तीन रैलियां भी कीं. जहां भी योगी पहुंचे, भारी भीड़ उमड़ी.
बुलडोजर का भी हुआ खूब जिक्र : सभाओं में उन्होंने टीएमसी पर 7000 से ज्यादा उद्योग बंद करने, बेरोजगारी, माफिया राज और हिंदू पहचान संकट का आरोप लगाया. साथ ही यूपी मॉडल का जिक्र करते हुए ‘डबल इंजन सरकार’ का वादा किया. सीएम योगी की रैलियों में ‘बुलडोजर’ का जिक्र खूब हुआ. उन्होंने कहा कि बंगाल में बदलाव आ रहा है और टीएमसी की सरकार जाने वाली है. एक रैली में शुभेंदु अधिकारी ने अपने चप्पल उतारकर योगी के पैर छुए, जो वायरल हो गया.
जय श्री राम के लगे नारे : यह दृश्य बंगाल में योगी की लोकप्रियता का प्रतीक बन गया. योगी ने रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर की उपेक्षा का भी मुद्दा उठाया. उनकी सभाओं में यूपी-बिहार जैसा माहौल दिखा, जहां लोग ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते दिखे. योगी के अलावा अन्य यूपी नेताओं की भी सक्रिय भूमिका रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (यूपी से जुड़े), रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व सांसद स्मृति ईरानी, मथुरा सांसद हेमा मालिनी को स्टार प्रचारक बनाया गया. राजनाथ सिंह ने भी बंगाल में रोड शो और सभाएं कीं, जहां उन्होंने ‘दुर्गा स्क्वॉड’ बनाने और सातवें वेतन आयोग का वादा किया.
यूपी से 24 नेता गए थे बंगाल : इसके अलावा, यूपी भाजपा के 24 से ज्यादा वरिष्ठ नेता बंगाल भेजे गए. इनमें चार मंत्री जेपीएस राठौर, दयाशंकर मिश्र दयालु, दिनेश खटीक, संजय गंगवार शामिल थे. राज्य के नेता और विधायक पीएन पाठक, अजय सिंह और सुरेश राणा जैसे नेताओं को बूथ स्तर पर काम सौंपा गया. इसके अलावा जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई.
चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हीरो बाजपेई ने बताया कि सभाओं के अलावा यूपी के अनुभवी नेताओं को बंगाल में चुनावी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई. यूपी के योगी मॉडल को बंगाल में लागू करने की प्लानिंग में ये नेता शामिल रहे. भाजपा ने यूपी की ‘बुलडोजर राजनीति’ और सख्त कानून व्यवस्था को बंगाल के मुद्दों से जोड़कर प्रचार किया. योगी आदित्यनाथ की छवि को केंद्र में रखकर पार्टी ने हिंदुत्व और विकास दोनों को जोड़ा. बंगाल के लोग योगी से खास तौर पर जुड़े. कई जगहों पर लोग कहते सुनाई दिए, योगी को सिर्फ सात दिन दे दो. उनकी रैलियों ने भाजपा के प्रचार को नई ऊर्जा दी.
2026 के बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी. मुख्य रूप से योगी आदित्यनाथ की सभाओं ने माहौल बना दिया. उनकी आक्रामक और विकासपरक बातें बंगाल की जनता को पसंद आईं. चाहे रैलियां हों या रणनीति, यूपी का योगदान भाजपा की कोशिशों में साफ दिखा.
