अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब में आज विभिन्न पंथक संगठनों, विद्वानों और वकीलों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा लाए गए नए कानून और पंथक मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
उन्होंने घोषणा की कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को 8 तारीख को सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त साहिब में स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की सेवा, संरक्षण और मर्यादा से जुड़े फैसले केवल गुरु पंथ ही कर सकता है, कोई सरकार नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘जगत जोत एक्ट’ में संशोधन करते समय न तो श्री अकाल तख्त साहिब को विश्वास में लिया और न ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से सलाह की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार की नीयत साफ थी, तो पंथक संस्थाओं को दरकिनार क्यों किया गया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंथ हमेशा बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा देने के पक्ष में है, लेकिन कानून के नाम पर सिख मर्यादा और स्वरूपों से जुड़ी जानकारी को वेबसाइट पर सार्वजनिक करना स्वीकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे श्रद्धालुओं की निजता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सरकारों की आलोचना करते हुए जत्थेदार ने कहा कि 2015 से बेअदबी की घटनाएं जारी हैं। दो सरकारें बदल चुकी हैं, लेकिन असली दोषी अब भी पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने मौर बम कांड का जिक्र करते हुए कहा कि सात निर्दोष लोगों की जान जाने के बावजूद आज तक पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने मामलों की सही पैरवी नहीं की, जिसके कारण कई अहम केस पंजाब से बाहर ट्रांसफर हो गए।
बैठक में बंदी सिखों, खासकर भाई बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। जत्थेदार ने कहा कि यदि देश के पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को रिहा किया जा सकता है, तो सिख कैदियों के लिए अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 में भाई राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पंथ आज भी भाई जगतार सिंह हवारा, भाई देविंदरपाल सिंह भुल्लर और अन्य सभी बंदी सिखों के साथ मजबूती से खड़ा है।
